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गेहूं क्रय केंद्रों पर अव्यवस्थाओं का ‘ताला’

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मलकौली गेंहु क्रय केन्द्र पर शुक्रवार से खरीदारी चालु हुई। - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। शासन-प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद किसानों के लिए क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। खरीद शुरू होने के डेढ़ माह बीतने के बाद भी क्रय केंद्रों पर माकूल इंतजाम नहीं हो पाए हैं। इसकी मार किसान झेल रहे हैं। क्रय केंद्र पर उपज लेकर पहुंचने के बाद उन्हें बोरों की कमी या जगह का अभाव बताकर वापस लौटा दिया जा रहा है। भुगतान में दिक्कतें पेश आ रही हैं। लिहाजा, मजबूर किसान बिचौलियों के शिकार हो रहे हैं। शुक्रवार को जिले के विभिन्न केंद्रों की पड़ताल के दौरान कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। नियमित क्रय केंद्र खोलने के दावों के बीच कई केंद्र बंद मिले। जो केंद्र खुले थे, वहां बोरे नहीं थे। ऐसे में इन केंद्रों पर आए किसानों को मायूूस लौटना पड़ा। हालांकि इन अव्यवस्थाओं के बावजूद जिम्मेदार बेहतर व्यवस्था के बीच लक्ष्य के 60 फीसदी तक खरीद पूरी होने के दावे करने से पीछे नहीं हैं।
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केस एक
18 दिन बाद आया बोरा तो शुरू हुई खरीद
साधन सहकारी समिति मलकौली पर बोरे की कमी के चलते 18 दिन से खरीद बंद थी। परेशान किसानों ने कई बार उच्चाधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन समाधान नहीं हुआ। शुक्रवार को यहां बोरे की खेप पहुंची तो खरीद शुरू हुई। दोपहर 1.20 बजे गेहूं तौल कराने के लिए कई किसान केंद्र पर पहुंचे थे। बरसात गांव के किसान त्रिलोकी यादव का कहना था कि कई दिनों से खरीद के लिए चक्कर लगा रहे थे, हर बार बोरा न होने की बात कह लौटाया जा रहा था। बाजार में 1400-1500 का ही दाम मिल रहा था। उधर, सचिव तूफानी का कहना था कि बोरे की अचानक कमी के चलते ऐसी नौबत आई है। नहीं तो अभी तक शत-प्रतिशत खरीद कर ली गई होती।

केस दो:
बंद था पैकौली का क्रय केंद्र
सदर ब्लाक के पैकौली में स्थापित सहकारी समिति का क्रय अपराह्न 2 बजे बंद था। यहां कई दिनों से स्थिति ऐसी ही है। गांव के किसान रवींद्र सिंह ने बताया कि बोरा नहीं होने के कारण केंद्र कई दिनों से बंद है। गेहूं बेचने के लिए बोरे का इंतजार किया गया, लेकिन व्यवस्था नहीं होने के कारण आढ़ती को 1600 रुपये क्विंटल के हिसाब से गेहूं बेचना पड़ा। सुरेमन सिंह ने कहा कि सरकार की इस व्यवस्था से परेशान गांव के अधिकांश किसानों का गेहूं आढ़तियों ने खरीदा है। केंद्र संचालक बाद में आढ़तियों का गेहूं लेकर ही लक्ष्य पूर्ति दर्शा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार एसडीएम से और तहसील दिवस में शिकायत की गई। बावजूद इसके गेहूं खरीद का कोई इंतजाम नहीं हो सका।
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कुशीनगर भेजा जा रहा देवरिया का गेहूं
गेहूं खरीद में सुस्ती का एक कारण भंडारण की समस्या भी है। कुल 7.19 लाख क्विंटल गेहूं खरीदने के लिए जिले में तीन स्थानों पर भंडारण की व्यवस्था की गई थी। रमवापुर, उसरा बाजार और सोनू घाट के गोदाम भर चुके हैं। कोई अन्य विकल्प न होने से जिले का गेहूं अब कुशीनगर भेजा जा रहा है। वहां अर्जुनहा व धुसपट्टा में स्थित गोदाम में ही कुशीनगर और महराजगंज का भी भंडारण हो रहा है। ऐसे में गेहूं लेकर जिले से जाने वाले ट्रकों को माल उतारने में तीन-चार दिन लग जा रहे हैं।

अब तक 4.52 लाख क्विंटल गेहूं खरीदा
शासन की ओर से जिले में 7.19 लाख क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है। एक अप्रैल से अब तक 4.52 लाख क्विंटल की खरीद हुई है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल अब तक ढाई गुना अधिक खरीद होने का दावा प्रशासन कर रहा है।

12 केंद्र प्रभारियों पर हो चुकी है कार्रवाई
जिले में किसानों की सहूलियत को देखते हुए 127 गेहूं क्रय केंद्र खोले गए। इनमें पांच क्रय केंद्र अनियमितता के आरोप में बंद हो गए। कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही और डीएम सुुजीत कुमार की जांच में खामियां भी मिली थीं। वर्तमान में 122 क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद हो रही है। पिछले दिनों खरीद में लापरवाही पर ही 12 क्रय केंद्र प्रभारियों पर कार्रवाई भी की गई है।
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इनसेट
केंद्र प्रभारियों को खुद जाना पड़ा बोरा लाने
शुक्रवार को नकहा रेलवे स्टेशन पर बोरे के 600 बंडल गांठ आए लेकिन प्रशासन के पास बोरे की गांठ देवरिया लाने के लिए कोई इंतजाम नहीं था। किसानों के दबाव को देखते हुए क्रय केंद्र प्रभारियों को अपने संसाधन से बोरा लाने जाना पड़ा।

दस दिन में मिले 850 गांठ बोरा
दस दिन में 850 बंडल गांठ बोरा अभी तक देवरिया में आया है। इसमें 250 गांठ प्लास्टिक के बोरे हैं। अगले हफ्ते 250 गांठ बोरा और आनेे की उम्मीद है। प्रशासन का दावा है कि इतने में गेहूं की खरीद पूरी कर ली जाएगी।


बोरों के अभाव में कुछ केंद्रों पर खरीद प्रभावित चल रही थी। अब पर्याप्त बोरों की उपलब्धता हो गई है। सभी क्रय केंद्रों पर पारदर्शिता से खरीद जारी है। अब तक 4.52 लाख क्विंटल गेहूं खरीदा गया है जो लक्ष्य का करीब 60 फीसदी है। अभी 30 जून तक खरीद होनी है।
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-जितेंद्र यादव, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी।
 
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