नीलांबुज मिश्र
देवरिया। माता-पिता की अज्ञानता से जिले में 254 बेकसूर बच्चे एड्स से जूझ रहे हैं। इस बीमारी के जद में आए दंपती के साथ-साथ बच्चों की दवा एड्स विभाग के कांउसलरों की देखदेख में चल रहा है। वही वर्तमान में 85 गर्भवती महिलाएं चिह्नित की गई हैं।
रोजगार के लिए बड़े शहरों में जा रहे लोग जानलेवा बीमारी एड्स लेकर लौट रहे हैं। इस कारण एड्स की चपेट में पत्नी व बच्चे आ रहे हैं। इसकी वजह से जिले में एड्स पीड़ितों की संख्या में इजाफा हो रहा है। एक दशक में एड्स से पीड़ित महिलाओं ने 307 बच्चों को जन्म दिया है। इसमें 254 एड्स से प्रभावित मासूमों का इलाज चल रहा है। लेकिन 53 बच्चों का क्या हुआ। इसका आंकड़ा विभाग के पास नहीं है। एड्स प्रभावित बच्चों का इलाज जिला अस्पताल में उनके माता-पिता के साथ चल रहा है। समय-समय से काउंसलर घर पहुंचकर इलाज से जुड़ी जानकारी भी लेते हैं। इन दिनों में एड्स पीड़ित 85 महिलाएं गर्भवती हैं, जिनका इलाज एड्स के जिला कार्यक्रम अधिकारी डा. वीरेंद्र कुमार झा की देखदेख चल रहा है।
ए कैटेगरी में देवरिया शामिल
प्रदेश के मऊ, इलाहाबाद, इटावा, बांदा और देवरिया इन पांच जिलों में एड्स के ज्यादा रोगी हैं। यह जिले ए श्रेणी की कैटेगरी में शामिल है। विभाग का मानना है कि पांचों जिलों के अधिकांश लोग रोजगार के शहरों में जाते हैं और जानलेवा बीमारी साथ लाते हैं।
एड्स की जद में जिले के 4970 लोग
जिले में एड्स रोगियों को चिह्नित करने और इलाज की शुरूआत वर्ष 2006 से शुरू हुई। तब से आज तक कुल 4970 एड्स रोगी मिले गए। इसमें 2913 पुरुष और 2048 महिला एड्स से पीड़ित हैं। इसके अलावा नौ किन्नर भी एड्स की चपेट में हैं।
45 दिन पूरे होने पर कराई जाती है जांच
एड्स के कार्यक्रम के अधिकारी डा. वीरेंद्र झा ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार खाने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा दी जाती है। पैरेंट्स टू चाइल्ड ट्रांसमिटेड पीपीसीटी यूनिट सेफ डिलेवरी किट से प्रसव के तत्काल बाद ड्रॉप पिलाई जाती है। 45 दिन पूरा होने पर शिशु की ब्लड की जांच कराई जाती है। निगेटिव रिपोर्ट आने पर 18 माह पूरे होने पर रैपिड टेस्ट में रिपोर्ट सामान्य आने के बाद बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ्य माना जाता है। एआरटी सेंटर में रोगियों की मॉनिटरिंग होती है और इलाज के साथ काउंसलिंग भी देते हैं।
यह बरते सावधानी
देवरिया। शादी से पहले युवक-युवतियां एचआईवी की जांच कराए। असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित रक्त सूई से बचे। सामान्य व्यक्ति भी बच्चों की जांच कराए। पौष्टिक भोजन और स्वस्थ्य जीवन शैली अपनाएं। धूम्रपान, और नशीली दवाओं का सेवन न करें। नियमित व्यायाम करें।