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50 पैसे में गोभी बेचने पर मजबूर किसान

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बरियारपुर। रबी व खरीफ फसलों पर कुदरत की मार बढ़ी तो किसानों ने सब्जी की खेती को आर्थिक तरक्की का जरिया बनाया। पैदावार छप्पर फाड़ हुई, गोभी बोरे में नहीं सीधा ट्रॉलियों में भरे जा रहे हैं। फिर भी किसानों की समस्या बरकरार है। उन्हें उपज के दाम नहीं मिल रहे हैं। खेत खाली करना किसानों की मजबूरी है। लाचारी का लाभ बड़े व्यापारी गांव में जाकर उठा रहे हैं।
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नौतन, धुसवा, लंगड़ा, बैकुण्ठपुर, बरियारपुर, सठियांव आदि गांव के किसान 50 पैसे से लगायत एक रुपये प्रति किलो गोभी की सब्जी बेचने को मजबूर हैं। जबकि वही सब्जी शहर में दस से 15 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है। इन गांवों में सब्जी की खेती मुख्य रूप से किसानों के जीविकोपार्जन का माध्यम है। गांव में गोभी की तुड़ाई का कार्य चल रहा है। भाव में मंदी आने से किसानों को प्रति एकड़ करीब 45 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। कम भाव देखकर पशुपालक हरा चारा के लिए गोभी खरीदकर पशुओं को खिला रहे हैं। चार महीने की मेहनत और 70 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च कर चुके किसानों का सब्जी की खेती से मोहभंग होने लगा है। सठियांव के किसान देवानंद का कहना है कि गोभी की बिक्री से हुई आमदनी गोभी तुड़ाई की मजदूरी के बराबर भी नहीं हो पा रही। धुसवा के किसान शैलेंद्र उपाध्याय का कहना है कि खेतों में अच्छी किस्म की महंगे बीज लगाए थे ताकि गोभी का फूल अच्छा होगा तो कीमत भी अच्छी मिलेगी, लेकिन इस साल गोभी की घटी कीमतों ने कमर तोड़ दी है। बैकुंठपुर के किसान रामधारी का कहना है कि फसल तैयार है। खेत खाली करने की मजबूरी है। पशु पालकों को बुलाकर कौड़ी के भाव गोभी दे रहा हूं।
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