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राष्ट्रगान याद नहीं तो हिंदी-संस्कृत के शिक्षक जिम्मेदार

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आसिफ इकबाल
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देवरिया। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शिक्षा की गुणवत्ता को जांचने का तरीका ईजाद किया है। छात्र-छात्राओं को राष्ट्रगान याद कराने की जिम्मेदारी हिंदी और संस्कृत के शिक्षकों की है। इससे शिक्षकों की छात्रों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करने की रुचि से अवगत हो सकेंगे। छात्रों ने राष्ट्रगान नहीं सुनाया तो महकमा कड़े कदम उठाएगा। शिक्षकों का वेतन रोकने के अलावा अन्य कार्रवाई तय है।
प्रदेश की भाजपा सरकार ने शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए तमाम अहम निर्णय लिए हैं। इसी के तहत यूपी बोर्ड के स्कूलों में एनसीईआरटी का सेलेबस शामिल हो रहा है। छात्रों को शिक्षा के प्रति रूझान पैदा करने के लिए तमाम कवायद आजमा रहा है, जिले में 524 इंटर कॉलेज हैं, जिसमें 18 राजकीय, 122 अनुदानित और 384 वित्तविहीन इंटर कॉलेज हैं, जिसमें अधिकांश स्कूल देहात इलाके में स्थित है। माध्यमिक शिक्षा विभाग प्रेयर असेंबली को प्रभावी बनाने में जुटा है। ताकि छात्र-छात्राएं देश-दुनिया की खबरों से अपडेट रहे। डीआईओएस ने शिक्षा की क्वालिटी जांचने का नया तरीका खोजा है। इसके तहत स्कूलों के निरीक्षण के दौरान छात्र-छात्राओं से राष्ट्रगान सुनेंगे। उनका दावा है कि इससे शिक्षा का स्तर असलियत में मालूम चलेगा। राष्ट्रगान सुनाने में छात्र-छात्राओं को अक्षम पाए जाने पर हिंदी और संस्कृत के शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उनका वेतन रोका जाएगा। जब तक छात्र-छात्राओं को राष्ट्रगान याद नहीं होगा। उस वक्त तक शिक्षक वेतन से महरूम रहेंगे। विभाग का मानना है कि दरअसल निरीक्षण के वक्त शिक्षक अलर्ट हो जाते हैं। ब्लैक बोर्ड पर पाठ्य सामग्री के बारे में जानकारी लिख देते हैं। इसके चलते शिक्षा की क्वालिटी का स्तर मालूम नहीं चल पाता है।
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शिक्षा की गुणवत्ता के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले। इसके लिए हर संभव कोशिश जारी है। निरीक्षण के दौरान छात्रों से राष्ट्रगान सुना जाएगा। छात्रों को अक्षम पाए जाने पर शिक्षकों का वेतन रोका जाएगा।
शिवचंद राम, डीआईओएस
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