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बाढ़ पीड़ितों को अपने पर छोड़ दिया है प्रशासन

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देवरिया। रुद्रपुर क्षेत्र के बाढ़ पीड़ित दोहरा मार झेल रहे हैं। एक कुदरत की तो दूसरा प्रशासन का। 52 गांव अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं, लेकिन प्रशासन के स्टीमर अब भी राहत सामग्री लेकर बहुत से गांवों में नहीं पहुंचे हैं। इससे पीड़ितों में आक्रोश है। जल प्रलय ने पीड़ितों को दाने-दाने को मोहताज कर दिया है। धान की खेती तो पीड़ितों की चौपट हुई ही, साथ में घरों में रखा गेहूं भी भीगने से सड़ने का खतरा पैदा हो गए है। बंधों पर पीड़ितों की जिंदगी प्लॉस्टिक के नीचे कट रही है। हालांकि राप्ती और गोर्रा अब शांत है, लेकिन गांवों में घुसे बाढ़ के पानी को निकलने में अभी वक्त लगेगा।
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22 अगस्त की रात को जमींदारी बांध टूटने से रुद्रपुर के 52 गांवों में शुरू हुआ। विनाशलीला थमने का नाम नहीं ले रही है। एकौना थाने के आसपास के गांवों में की हालत बेहद दयनीय है। शासन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 6 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। लेकिन उसकी नींद तब टूटी जब सीएम योगी आदित्यनाथ का दौरा रुद्रपुर में लगा। 26 अगस्त को सीएम रुद्रपुर के सतासी इंटर कॉलेज में पीड़ितों को राहत सामग्री बांटने के लिए आने वाले थे। रातों-रात प्रशासन ने सारी तैयारियां कर ली, ताकि सीएम के सामने उनकी पोल न खुले। कई दिनों से बाढ़ का दंश झेल रहे पीड़ितों को राहत सामग्री के पैकेट थमा दिए गए, लेकिन इंद्रदेव को देखा नहीं गया। सीएम का कार्यक्रम विलंब हुआ तो इंद्रदेव ऐसे बरसे की योगी के लिए बने मंच का ऊपरी हिस्सा गिर गया। अंततोगत्वा सीएम को दौर निरस्त हो गया। सूत्र बताते हैं कि बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए सीएम ने काबीना मंत्री सूर्यप्रताप शाही की जिले में ड्यूटी लगा रखी है। वह इस समय प्रत्येक दिन रुद्रपुर का दौरा कर रहे हैं। फिर भी सभी बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने में प्रशासन नाकाम है। बाढ़ पीड़ित छोटेराम ने कहा कि राहत सामग्री वितरण में भी भेदभाव हो रहा है। यह देखा जा रहा है कि कौन किसका आदमी है। प्रभावती ने कहा कि उनका पूरा परिवार करीब एक सप्ताह से बंधे पर है। प्रशासन ने तब सुधि ली जब सीएम का कार्यक्रम लगा।
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