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घाघरा में आए सैलाब के सामने बेबस हैं बाढ़ पीड़ित

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सच्चिदानंद पांडेय
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बरहज। घाघरा के उग्र रूप के आगे बाढ़ पीड़ित बेबस हैं। सरकार की ओर से उन्हें मिलने वाली राहत सामग्री नाकाफी साबित हो रही है। करीब दो दिनों से घाघरा के जलस्तर में कमी से बाढ़ का पानी घरों को छोड़ रहा है, लेकिन उनसे उठने वाली दुर्गंध और बीमारियों की आशंका से लोग भयभीत हैं।
करीब एक माह से घाघरा के उफनाने से नदी का पानी तटवर्ती क्षेत्र के गांवों और घरों में घुस गया। परसियां-विशुनपुर देवार के 25 टोलों सहित भदिला प्रथम, धनया कुंद महाल, रामपुर कोटवां, कोलखास के विस्थापितों के गांव बाढ़ की जद में आ गए। इससे पीड़ितों का जीवन नरक से भी बदतर हो गया है। बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रशासन की ओर से छोटी नाव लगाई गई है। इसके सहारे बाढ़ पीड़ित जान जोखिम में डाल घाघरा की तेज लहरों पर भोजन के जुगत में नदी पार कर रहे हैं। बाढ़ से घिरे विशुनपुर देवार के प्रधान अशोक यादव, मिश्री लाल, सुुभाष यादव, गनेश यादव, गोबरी मल्लाह, बिकाऊ, सुब्बा, केदार चौहान, गंगा चौहान आदि ने बताया कि करीब एक माह से बाढ़ का पानी गांव और घरों को जद में लिए है। दो दिनों से जलस्तर में आई कमी से बाढ़ का पानी घरों को छोड़ रहा है, लेकिन घर में रखे राशन खराब हो गए हैं। सरकार से मिलने वाली राहत सामग्री भी कम पड़ रही है। चारा संकट से पशु बंधों पर बेहाल बंधे हुए हैं।
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मुसीबत बनी आंधी-पानी
दियारा और तटवर्ती गांवों के कुछ लोग बांध और कपरवार के उग्रसेन सेतु के पास रामजानकी मार्ग पर पशुओं और परिवार के साथ प्लास्टिक का टेंट डाल कर रह रहे हैं। करीब चार दिनों से दिन में प्रतिदिन तेज हवा और झमाझम बारिश टेंट उजाड़ते हुए उन्हें भिगो रही है।
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