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हिंदी में लिखना होगा मदरसों का नाम

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देवरिया। अब मदरसों का नाम हिंदी में लिखने का फरमान जारी हुआ है। तर्क है कि उर्दू कम लोग जानते हैं। हिंदी में लिखने से निरीक्षण के अलावा अन्य लोगों को सहूलियत मिलेगी। गौरतलब है कि सपा सरकार के कार्यकाल में समस्त विभागों और अफसरों के नाम उर्दू में लिखे गए थे।
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जिले में 197 मदरसा मान्यता प्राप्त हैं, जिसमें तहतानिया के 21, फौकानिया के आठ, आलिया के 156, जबकि 17 अनुदानित हैं। इसके अलावा आलिम, कामिल और फाजिल की तालीम भी दी जाती है। अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विभाग की ओर से मदरसों का नाम हिंदी में लिखने लिए कहा गया है। तर्क है कि उर्दू में लिखावट से सबको जानकारी नहीं मिल पाती है कि यहां पर किस क्लास और कौन सी तालीम दी जाती है। उनका दावा है कि अधिकांश आबादी उर्दू नहीं जानती है। मदरसा की टाइमिंग कब खुलता है कब बंद होगा। सब कुछ ब्योरा दर्ज करना होगा।
इनसेट
आठ और 15 हजार मिलता है मानदेय
देवरिया। जिले के 103 मदरसों में आधुनिक विषयों के शिक्षक तैनात हैं, जो हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विषय को पढ़ाते हैं, जिससे दुनियावी तालीम से कदमताल कर सके। इसमें 236 शिक्षक में 50 महिलाएं शामिल हैं। मानदेय के तौर पर स्नातक डिग्री धारकों को आठ हजार के अलावा परास्नातक और बीएड वालों को 15 हजार रुपये मासिक भुगतान होता है।
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कोट्स
मदरसों का नाम हिंदी में लिखने से सहूलियत रहेगी। निरीक्षण के दौरान ढूढने में दिक्कत होती है। आस पास के लोगों को भी जानकारी मिलेगी।
नीरज अग्रवाल, अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ अधिकारी।
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