खत्म नहीं होगी बीआरडी कॉलेज की मान्यता : शाही
कृषि मंत्री ने कहा, कॉलेज की मान्यता पर कोई संकट नहीं, भ्रम फैलाया जा रहा
अगर जमीन की आवश्यकता हुई तो की जाएगी प्रतिपूर्ति, निश्चिंत रहे लोग
मनीष जायसवाल
देवरिया। कृषि शिक्षा के लिए पूर्वांचल के प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार शहर के बीआरडी पीजी कॉलेज की मान्यता पर किसी भी तरह के संकट से कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने स्पष्ट इनकार किया है। उन्होंने कहा कि कॉलेज की मान्यता खत्म नहीं होने दी जाएगी, लोग इसकी चिंता छोड़ दें। वह जिला प्रशासन से मिलकर शीघ्र इसका समाधान कराएंगे।
रविवार को अमर उजाला से बातचीत में कृषि मंत्री ने कहा कि कॉलेज सरकारी नहीं, प्रबंधकीय है। जिस भूमि का उल्लेख किया जा रहा है, वह सरकार के नाम की है। उस पर कॉलेज के नाम का कोई सपोर्ट नहीं है। फिर भी इससे कॉलेज की मान्यता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। मान्यता के लिए जो भी आवश्यकता होगी, उसकी प्रतिपूर्ति कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि सिर्फ निहित स्वार्थों के लिए मान्यता खत्म होने का भ्रम फैलाया जा रहा है। वह जल्द ही यहां आकर जिला प्रशासन से पूरे मामले का निवारण कराएंगे। लोग इसकी चिंता छोड़ दें। विद्यार्थियों और जिले का अहित किसी भी हाल में नहीं होगा। बता दें कि देवरिया खास नगर, बाहर में 11.258 हेक्टेयर भूमि पर अंकित बीआरडी पीजी कॉलेज का नाम पिछले माह एसडीएम ने नियम विरुद्ध बताते हुए निरस्त कर दिया है। इसके बाद से ही कॉलेज में कृषि पाठ्यक्रम की मान्यता संकट में पड़ने के दावे किए जा रहे हैं। इसे लेकर कई दिनों से छात्र व विभिन्न संगठन आंदोलित भी हैं। कृषि मंत्री का गृह जिला होने के कारण मामला काफी तूल पकड़ रहा है।
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युवजन सभा ने प्रदेश सरकार का पुतला जलाया
बीआरडीपीजी कॉलेज को जमीन का आवंटन रद्द करने पर जताया आक्रोश
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बीआरडीपीजी कॉलेज की जमीन के मुद्दे को लेकर समाजवादी युवजन सभा के कार्यकर्ताओं ने रविवार को पोस्टमार्टम चौराहे के पास विरोध प्रदर्शन किया। जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार का पुतला जलाया और नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सपा नेता विजय रावत ने कहा कि शासन व कॉलेज प्रशासन की मिलीभगत से कॉलेज की जमीन को निरस्त किया गया है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जमीन को निरस्त किए जाने से कृषि विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त होने की उम्मीदों को भी झटका लगा है। युवजन सभा के पूर्व जिलाध्यक्ष रणवीर यादव ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार में हर वर्ग परेशान है। हर वर्ष दो करोड़ बेरोजगारों को रोजगार देने का वादा छलावा साबित हुआ है। सछास जिलाध्यक्ष मनोज यादव व युवा नेता हरिओम यादव ने कहा कि अगर कॉलेज की जमीन को वापस नहीं किया गया तो युवा सपाई आंदोलन को बाध्य होंगे। प्रदर्शन में बृजानंद यादव, सुमंत भारद्वाज, विकास यादव, अंकित अहीर, शादाब मिर्जा, सत्या यादव, अहमद खालिद, शुभम वर्मा, अविनाश चौहान, हरिकेवल यादव, अखिलेश यादव, मनीष दीक्षित, ईश्वरचंद विश्वकर्मा, अमित प्रधान, आशीष चौहान, कमलेश सिंह, अरविंद कुमार, गुड्डू यादव, सुनील यादव, मो.सैफ, मुराद अहमद आदि शामिल रहे।
आज निकालेंगे जुलूस, कल से धरना
छात्र संघ पदाधिकारियों ने बैठक कर लिया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बीआरडीपीजी कॉलेज को भूमि का आवंटन निरस्त करने के विरोध में चार दिसंबर से विभिन्न संगठन के लोग आंदोलन छेड़ेंगे। इसके लिए तीन दिसंबर को जुलूस निकालकर प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल डीएम से मिलकर ज्ञापन देगा। रविवार को छात्र संघ की बैठक में यह निर्णय लिया गया। छात्र संघ अध्यक्ष जयसिंह यादव ने कहा कि प्रशासन न इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में विवश होकर आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होना पड़ रहा है। बैठक में मनीष पटेल, शिवम, बलराम यादव, रविशंकर नाथ त्रिपाठी, अभिषेक यादव, श्रवण शर्मा, प्रिंस जायसवाल, बृजकुमार यादव, धीरज कुमार, अनुपम यादव, अश्वनी पासवान, हरिओम कुमार, राजन सिंह, सुमित सिंह, सुनील यादव, अनूप कुमार, प्रकाश रंजन गुप्ता, मंटू कुशवाहा, सत्यप्रकाश, अजय चौरसिया आदि शामिल रहे।
कॉलेज को बचाने की पहल करें कृषि मंत्री
देवरिया। बीआरडी कॉलेज प्रकरण में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रामायण राव व तस्लीम मलिक उर्फ मल्लू ने छात्रों के आंदोलन को समर्थन का एलान किया है। उन्होंने कहा कि कहा कि बीआरडी कॉलेज पूर्वांचल के कृषि शिक्षा क्षेत्र में अमूल्य धरोहर है। इसकी स्थापना काल से अब तक कृषि क्षेत्र में अनेक सफल प्रयोग व कृषि शिक्षा के विकास में छात्रों ने कार्य किया। शासन-प्रशासन की मिलीभगत से कॉलेज की मान्यता ही नहीं, बल्कि छात्रों का भविष्य भी अधर में डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि आम चुनाव में इस कॉलेज को विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने का वादा किया गया था, वहीं, अब इसके भविष्य पर भी संकट आ गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए जिला प्रशासन के पास अनेक भूमि है। जिला पंचायत, पीडब्लूडी, नगर पालिका जैसी संस्थाओं की जमीन पर आवास बनवाया जा सकता है, लेकिन प्रशासन कॉलेज की भूमि के पीछे ही पड़ा है। उन्होंने कृषि मंत्री से हस्तक्षेप कर कॉलेज का अस्तित्व बचाने व इसे विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की मांग की।