अस्थायी चल रहे मदरसों को स्थायी मान्यता देगी प्रदेश सरकार
मानक पूरी करने वाले मदरसे स्थायी मान्यता के लिए जमा कर दें फाइल
पूरी नहीं हुई है मानक तो कराना पड़ेगा नवीनीकरण
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर कारखाना। अस्थायी मान्यता पर संचालित हो रहे मदरसा संचालकों के लिए खुशखबरी है। प्रदेश सरकार ने मानक पूरा करने वाले मदरसों को स्थायी मान्यता देने का फैसला किया है। जिन मदरसों ने मानक पूरा कर लिया है, उन्हें अपनी फाइल अल्पसंख्यक विभाग के कार्यालय में जमा करने के दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। मानक पूरा न करने वाले मदरसों को अस्थायी मान्यता का नवीनीकरण कराना होगा।
प्रदेश सरकार ने मदरसों में बेहतरी के लिए एक और कदम उठाया है। मदरसा नियमावली के अनुसार जिन मदरसों ने अस्थायी मान्यता लेकर पांच वर्ष तक शिक्षण कार्य कार्य पूरा कर लिया है, उनको स्थायी मान्यता दी जाएगी। मदरसों को स्थायी करने के फैसले से संचालकों और उनमें पढ़ाने वाले शिक्षकों ने खुशी जताई है। स्थायी मान्यता मिल जाने से इन मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को सरकारी मदद का फायदा होगा। आलिया स्तर की स्थायी मान्यता के लिए 300 वर्ग फीट के 12 कमरे होने जरूरी हैं। अध्यापकों की नियुक्ति मानक के अनुसार होनी चाहिए। इस संबंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नीरज कुमार अग्रवाल ने कहा कि पांच वर्ष अस्थायी मान्यता लेकर मदरसा चलाने वाले संचालक स्थायी मान्यता के लिए फाइल जमा कर दें। जो मदरसे मानक पूरी न करते हों, वे नवीनीकरण की फाइल कार्यालय में जमा कर दें।