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ढूंढे नहीं मिल रहे आयुष्मान योजना के मरीज

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ढूंढे नहीं मिल रहे आयुष्मान योजना के मरीज
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कागजों तक सिमटा प्रधानमंत्री का आयुष्मान योजना
एक माह में एक भी नहीं आए मरीज, खामियों में उलझी योजना
जिला अस्पताल में श्रीगणेश के लिए खोजा जा रहा मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। आयुष्मान भारत योजना में शामिल लोगों को बेपटरी हुए सिस्टम का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। यही वजह है कि तमाम कोशिशों के बावजूद अभी तक एक भी मरीज को इस योजना के तहत इलाज नहीं मिल सका। जिला अस्पताल में आने वाले अंत्योदय और बीपीएल सूची में शामिल मरीजों को कर्मचारी और डॉक्टर चिह्नित कर रहे हैं, लेकिन इनका नाम आयुष्मान योजना के लिए चयनित हुई सूची में नहीं है। इसे लेकर जिम्मेदार असमंजस में हैं।
आधी-अधूरी तैयारियों और अव्यवस्था के बीच आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत केंद्र सरकार की ओर से 23 सितंबर को किया गया। अनेक खामियों से जूझ रही इस योजना का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा है। वर्ष 2012 में हुई सामाजिक-आर्थिक गणना की सूची से पात्रों का चयन किया गया है। इसकी वजह से अधिकांश पात्र लोग वंचित हो गए हैं। चिह्नित अस्पतालों में आने वाले मरीजों को डॉक्टर-कर्मचारी बीपीएल और अंत्योदय के आधार पर सूची बना रहे हैं, लेकिन जब जांच की जा रही है तो इनका नाम आयुष्मान भारत योजना की सूची में शामिल ही नहीं है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की दस दिनों से ट्रैकिंग चल रही है, लेकिन कोई भी मरीज चयनित नहीं हो पाया है। उधर, शासन की ओर से लगातार जिम्मेदारों पर आयुष्मान योजना में शामिल मरीजों का इलाज शुरू करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसे लेकर स्वास्थ्यकर्मी परेशान हैं। सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को चिह्नित किया जा रहा है। वास्तव में वह गरीब हैं और पात्रता योग्य भी हैं, लेकिन आयुष्मान की सूची में इनका नाम नहीं होने से निशुल्क इलाज से वंचित हो रहे हैं।
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वर्जन
आयुष्मान योजना की शुरुआत जल्दबाजी में हो गई, इसलिए थोड़ी परेशानी हो रही है। कई तरह की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे ठीक करने की कोई व्यवस्था नहीं दी गई है। मरीजों को इलाज कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
-डॉ. एसएन सिंह, एसीएमओ व नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना।


केस एक: त्रुटि दूर कराने को काट रहा चक्कर
रौनियारी मोहल्ला निवासी सत्येंद्र का नाम आयुष्मान की सूची में राजेश प्रिंट हो गया है। नाम गलत होने के कारण इनका गोल्डन कार्ड नहीं बन पा रहा है। लिहाजा योजना का लाभ भी इन्हें नहीं मिलेगा। स्थानीय स्तर पर ऐसे त्रुटियों को सही करने के लिए कोई इंतजाम नहीं है।

केस दो: आयुष्मान योजना की सूची से वंचित
सहोदरपट्टी गांव निवासी कृष्ण चंद्र गुप्ता का गुर्दा फेल है। सप्ताह में दो दिन डायलसिस कराना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार बीमारी को लेकर परेशान हैं। आयुष्मान योजना के जो मानक हैं, उसके तहत पात्र भी है मगर उसका नाम आयुष्मान योजना की सूची में नहीं है।


शासन स्तर से शुरू हुई रिपोर्टिंग
देवरिया। आयुष्मान योजना को धरातल पर लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। बावजूद इसके एक भी मरीजों का इलाज एक माह में भी नहीं हो सका। प्रत्येक दिन इसकी रिपोर्टिंग शासन स्तर से की जा रही है। योजना को धरातल पर लाने में अभी वक्त लगेगा।
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इनसेट
13 अस्पताल किए गए चयनित
देवरिया। आयुष्मान योजना के अंतर्गत सात सरकारी और छह निजी अस्पतालों का चयन किया गया है, जहां मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा। शुरुआती दौर में सिर्फ 11 अस्पताल ही थे, लेकिन अब रुद्रपुर के आशीष अस्पताल और शहर के बाबा राघवदास अस्पताल राघव नगर को भी चयनित किया गया है।
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