देवरिया। पुलिस की चुप्पी से डॉक्टर की क्लीनिक पर भाजपा नेता की पिटाई का मामला बढ़ता जा रहा है। एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में भाजपा नेताओं ने सोमवार को एडीजी दावा शेरपा से मिले। एमएलसी ने 72 घंटे के अंदर आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी नहीं होने पर आगे की लड़ाई की चेतावनी दी।
सीसी रोड स्थित डॉ. चंद्रभान मिश्रा की क्लीनिक पर दवा वापसी के दौरान भाजपा नेता राधेश्याम शुक्ल से विवाद हो गया। डॉक्टर व उनके कर्मचारियों ने भाजपा नेता की पिटाई की और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने मामूली धारा में डॉक्टर और कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। इसको लेकर डॉक्टरों का संगठन आईएमए और भाजपा नेता आमने-सामने हो गए। दबाव में आई पुलिस ने तीन दिन बाद भाजपा नेता पर भी मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद भाजपा नेता और नाराज हो गए। एमएलसी देवेंद्र सिंह के साथ एडीजी गोरखपुर के पास पहुंचे भाजपा नेताओं ने डॉक्टर की ओर से दिए गए धमकी और कर्मचारियों की पिटाई का वीडियो दिखाते हुए आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार करने और भाजपा नेता पर दर्ज मुकदमा वापस करने की मांग की। वहीं एसपी राकेश शंकर के निर्देश पर एएसपी सुरेंद्र बहादुर मामले की जांच कर रहे हैं। शहर कोतवाल की भूमिका पर भाजपा नेता शुरू से सवाल खड़ा कर रहे हैं। पुलिस की चुप्पी साधने की वजह से मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एडीजी से मिलने वालों में राजू मणि, राधेश्याम शुक्ल, रत्नेश्वर वर्मा, नवीन सिंह, रामदास मिश्र, अंबिकेश पांडेय शामिल रहे।
कर चोरी का आरोप
भाजयुमो के जिला अध्यक्ष दुर्गेश पांडेय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर से मिलकर प्राइवेट डॉ. चंद्रभान मिश्रा की क्लीनिक में बिना पंजीकरण चल रही दवा की दुकानों से हो रही कर चोरी की जांच कराने की मांग की। नेताओं का आरोप है कि इलाज के नाम पर मरीजों का शोषण किया जाता है। अधिक कीमत में दवाइयां बेची जाती है। ड्रग इंस्पेक्टर की जांच में कई गड़बड़िया मिली। इससे राजस्व की हानि हो रही है। इस दौरान धनुषधार मणि, नवीन सिंह, राजेश सिंह कुशवाहा, अंकित तिवारी, पंकज मिश्र मौजूद रहे।
तय समय में नहीं हुई जांच
भाजपा नेता और प्राइवेट डॉक्टर के बीच हुई मारपीट की घटना के लिए सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. एसएन सिंह के नेतृत्व में जांच के लिए आठ मार्च को टीम गठित की। तीन दिनों में क्लीनिक के मानकों की जांच कर रिपोर्ट सौंपना था। लेकिन एसीएमओ उसके सुबह छुट्टी पर चले गए। इसके चलते जांच अधर में लटका हुआ है। सत्ता पक्ष से जुड़ा मामला होने के कारण आरोपी डॉक्टर को बचाने में पेशे से जुड़े अफसर गोपनीय रूप से कोशिश कर रहे हैं।