देवरिया। विभागीय अफसरों की खींचतान में राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम फ्लाप हो रहा है। इस चक्कर में मोतियाबिंद के मरीज पीस रहे हैं। दो दिन से जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को लौटना पड़ रहा है। मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए तय लक्ष्य पूरा करना मुश्किल है।
अंधता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पांच अक्टूबर से 31 मार्च तक 15929 हजार मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों का ऑपरेशन करने का लक्ष्य शासन की ओर से जिले में निर्धारित किया गया है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिला अस्पताल में तैनात आंख के डॉक्टर डॉ. मनोज सिन्हा और डॉ. प्रकाश श्रीवास्तव की ड्यूटी ओपीडी प्रभावित होने की वजह से प्रथम पाली में नहीं लगाई गई है। इसकी वजह से स्वास्थ्य विभाग के कई अफसरों की प्रतिष्ठा टकरा रही है और अंधता नियंत्रण योजना को पलीता लग रहा है। सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने जिला अस्पताल के ओटी में शिविर में आने वाले मरीजों का आंख का ऑपरेशन करने से पहले दिन ही रोक दिया। शुक्रवार को भी आठ मरीज आए। शिविर में जिसकी ड्यूटी लगी थी वह नेत्र सर्जन पहुंचे और ऑपरेशन के लिए मरीजों की आंख में दवा डलवा दिए। दोपहर बाद इसकी जानकारी हुई तो सीएमएस भड़क गए और किसी भी कीमत पर आंख का ऑपरेशन नहीं होने देने की बात कही। इस बाबत सीएमओ डॉ. रामनिवास ने बताया कि मामला संज्ञान में है। बेवजह सीएमएस ऑपरेशन रोक रहे है। इसका समाधान निकाला जा रहा है।
जिला अस्पताल में पहले नेत्र सर्जन नहीं थे। इस लिए यहां से नेत्र सर्जनों को अटैच किया गया था। अंधता नियंत्रण कार्यक्रम में जिला अस्पताल के नेत्र सर्जनों की ड्यूटी लगानी चाहिए। बाहरी नेत्र सर्जन जिला अस्पताल की ओपीडी में नहीं ऑपरेशन कर सकते हैं।
डॉ. छोटेलाल सीएमएस