सच्चिदानंद पांडेय
बरहज। घाघरा में आए सैलाब से दियारा के 25 टोलों सहित करीब आधा दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। करीब एक माह से बाढ़ का अभिशाप झेल रहे बाढ़ पीड़ित पानी हटने के बाद दुबारा एक-एक तिनका बटोर कर आशियाना ठीक करने के साथ जिंदगी की नई शुरुआत करने में जुटे हैं। जबकि पीड़ितों को होने वाले आंधी-पानी का भय सता रहा है।
करीब एक माह पूर्व घाघरा में दोबारा आए उफान से नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर 67.95 मीटर पर पहुंच गया था। जिसके कारण बाढ़ का पानी परसियां-विशुनपुर देवार के 25 टोलों सहित नगर के जयनगर, गौरा, पटेल नगर, कटइलवा गांव में घुस गया था। यहां तक कि बाढ़ में पूर्व में पूरी तरह तबाह हो चुके कोलखास के विस्थापितों का उग्रसेन सेतु के समीप नया आशियाना डूब गया था। जिससे उन लोगों ने रामजानकी मार्ग पर शरण ले रखा था। क्षेत्र में करीब 25 दिनों तक बाढ़ का मंजर होने और घरों में पानी घुसने से उनके अधिकांश झोपड़ी ध्वस्त हो गई हैं। कोलखास के विस्थापित गोबरी यादव, दुक्खी, वीरेंद्र, लालसा, राजेश, रामसुभग, गनेश आदि का कहना है कि बाढ़ मेहनत की कमाई को बहा ले गई। जमीन पूरी तरह दलदल हो गई है। पक्षियों के उजड़े घोसलों की तरह एक-एक तिनका बटोर आशियाना ठीक करने के साथ जिंदगी पटरी पर लाने में काफी वक्त लगेगा। बाढ़ पीड़ित अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कभी सरकार तो कभी किस्मत को कोस रहे थे। पुराने घर के वापसी के लिए सड़क के किनारे टेंट और सामान समेट रही 60 वर्षीया फूलमती, गीता साहनी, संजू और ज्ञानती आदि बारिश को लेकर काफी चिंतित हैं। पानी लगा होने के कारण कईयों का आशियाने ध्वस्त होने की आशंका सता रही हैं।