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कानून का दिखाया भय तो बेटा ने मां को अपनाया

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देवरिया। बिखारी की जिंदगी जीने को मजबूर बीमार एक बुजुर्ग महिला के लिए आशा ज्योति केंद्र मददगार साबित हुआ। महिला को हक दिलाने का दावा करते हुए सुगमकर्ता ने जब कानून का पाठ पढ़ाया तो बेटा की हवाई गुम हो गई। अपनी गलती पर अफसोस करते हुए मां को जिला अस्पताल से घर ले गया और उसकी सेवा कर रहा है।
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घरेलू हिंसा और महिला उत्पीड़न की समस्या से एक छत के नीचे निजात दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने आशा ज्योति केंद्र खोल रखा है। इन दिनों जिला अस्पताल कैंपस में संचालित हो रहा है। वूमेन हेल्पलाइन 181 पर कॉल करने वाली सभी महिलाओं की मदद करना इसका उद्देश्य है। जनपद में 24 जून से इसकी शुरूआत की गई। तब से अब तक 12 महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराया और इसका निस्तारण हुआ। रामलक्षन के मिश्रौलीया गांव की रामरती 65 के पति की मौत के बाद बेटों ने मां को दरकिनार कर धोखे से सिर्फ अपने नाम जमीन वरासत करा लिया। गांव में बुजुर्ग महिला भिखारी की तरह जिंदगी गुजारने को मजबूर हो गई थी।
कुछ दिन पूर्व वह रात को गिर गई और उसकी पैर की हड्डी फ्रैक्चर हो गया। इसकी दुर्दशा देख गांव के शंभू सिंह ने 7 जुलाई को 181 पर दिया। गांव पहुंची रेफक्यू वैन अचलस्त महिला को जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया। महिला ने बताया कि लालबचन चौहान और शंकर दो बेटे हैं। दोनों अलग रहते हैं और मुझे घर से निकाल दिए हैं। कई साल से भिखारी की जिंदगी जी रही हूं। सुगमकर्ताओं ने पुलिस की मदद से दोनों बेटों को तलब किया और धोखे से जमीन वरासत कराने का हवाला देते हुए केस दर्ज कराने की बात कही। इस डर से 13 दिन बाद शंकर चौहान मां को साथ रखने के लिए राजी हुआ और घर ले गया। इन दिनों घर पर रखकर अपनी मां का सेवा कर रहा है। आशा ज्योति केंद्र के प्रभारी जिला प्रबेशन अधिकारी अनूप कुमार ने बताया कि दो माह में 12 शिकायत मिली। इसका निस्तारण कराया। इसमें सबसे गंभीर मामला रामरती का था। काफी प्रयास के बाद साल्व हुआ।
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