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बसपा के कदम से गठबंधन पर

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आसिफ इकबाल
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देवरिया। बसपा द्वारा सलेमपुर से प्रभारी/प्रत्याशी के नाम का एलान किए जाने से जहां क्षेत्र में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है, वहीं बसपा के इस कदम को 2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों के संयुक्त प्रत्याशी उतारे जाने की संभावनाओं पर कुठाराघात के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा विरोधी दलों की एकजुटता के लिए जहां राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव सपा, बसपा और कांग्रेस समेत अन्य दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश में हैं। इस एकता को बल देने के लिए ही उन्होंने मायावती के राज्यसभा से इस्तीफा दिए जाने के बाद उन्हें बिहार से राज्यसभा में भेजने का ऐलान किया है। दूसरी ओर बसपा ने सलेमपुर से प्रत्याशी की घोषणा किए जाने को राजनीतिक जानकार एकजुटता की इस कवायद से अलग मायावती के ‘एकला चलो’ की नीति अपनाने के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
विधानसभा चुनाव 2017 में अप्रत्याशित सफलता मिलने के बाद भाजपा उत्साहित है। सपा, बसपा और कांग्रेस नई रणनीति बनाने में जुटे हैं, जबकि बसपा संगठन की ओवरहॉलिंग में जुटी है। भाजपा इन दलों को कोई मौका देना नहीं चाहती है। भाजपा विरोधी दलों की एका के लिए राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव सक्रिय हैं। इसके तहत लोकसभा सीटों का आपस में बंटवारा करके आपसी सहमति से विपक्षी दलों के उम्मीदवार खड़े किए जाने हैं, ताकि संयुक्त प्रत्याशी उतारने के बाद भाजपा से मुकाबला कर सकें।
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इधर बिहार सीमा से सटे देवरिया के सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से बसपा के प्रत्याशी की घोषणा किए जाने के भी अपने राजनीतिक मकसद और उद्देश्य हैं। दरअसल कुछ दिन पहले पश्चिम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दलितों के कथित उत्पीड़न के खिलाफ मायावती मुखर हो गई हैं। इस मामले में वह खुद को किसी से भी पीछे नहीं दिखने देना चाहतीं। सलेमपुर से बसपा के प्रत्याशी की घोषणा को इसी कवायद के तहत उठाया गया कदम माना जा रहा है। उधर, जिला पंचायत के सभागार में रविवार की देर शाम को सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से डॉ. अरविंद सहाय के नाम के ऐलान से कई सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बिहार में महागठबंधन फेल होने से माया ‘एकला चलो’ की नीति पर अमल में जुटी हैं और अरविंद के सहारे सूबे के इस हिस्से मेें पिछड़ी जातियों का वोट बैंक साधने की कोशिश में हैं। यह सीटों का बंटवारा भी अपने हिसाब से करने का प्लॉन है और बसपा को कमजोर समझने वालों को एक संदेश भी है।
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