देवरिया। जिले में आत्महत्या के बढ़ते मामलों ने पुलिस-प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पिछले पांच वर्षों में जिले में कुल 294 लोगों ने खुदकुशी कर ली है। यह संख्या साल दर साल तेजी से बढ़ती जा रही है। आंकड़े बता रहे हैं कि वर्ष 2021 में जहां जिले भर में 29 लोगों ने आत्महत्या की थी, वहीं 2025 में नवंबर तक ही यह आंकड़ा 70 तक पहुंच चुका है। अभी एक महीना शेष है। वहीं लगातार बढ़ रही इस संख्या की वजहों को समझने और रोकथाम के उपाय तलाशने के लिए अब पुलिस ने विस्तृत जांच की तैयारी शुरू कर ली है।
बढ़ते पारिवारिक तनाव और सामाजिक, आर्थिक कारणों के चलते लोग बहुत खुदकुशी जैसे कदम उठा ले रहे हैं। आए दिन हो रही इन घटनाओं ने समाज के साथ-साथ पुलिस महकमे की चिंता भी बढ़ा दी है। नवविवाहिता से लेकर बुजुर्ग तक आत्महत्या कर रहे हैं। इसको देखते हुए पुलिस प्रशासन ने जिले में तीन सर्वाधिक आत्महत्या वाले थाने चिन्हित करने का निर्णय लिया है। ये थाने दर्ज एफआईआर के आधार पर चिन्हित किए जाएंगे। इसके बाद आत्महत्या करने वालों की उम्र और लिंग आदि के आधार पर भी सूची बनाई जाएगी। इसके लिए क्षेत्र में होने वाली घटनाओं का पांच वर्ष का पूरा रिकॉर्ड दोबारा खंगाला जाएगा। इसके तहत प्रत्येक घटना का प्रकार, आत्महत्या करने वाले की आयु, पारिवारिक स्थिति, आर्थिक पृष्ठभूमि, पहले किसी बीमारी या मानसिक तनाव का इतिहास और घटना का तत्काल कारण जैसे सभी बिंदुओं को व्यवस्थित रूप से दर्ज किया जाएगा।
पुलिस का मानना है कि कई मामलों में पारिवारिक कलह, आर्थिक तंगी, बीमारी, नशे की लत, प्रेम-प्रसंग या अकेलेपन जैसे कारण सामने आते हैं, लेकिन कहीं न कहीं सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर होने वाले बदलावों को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि इस बार जांच सिर्फ कागजी नहीं होगी, बल्कि गहन पड़ताल के साथ एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह रिपोर्ट जिले में आत्महत्या के पैटर्न को समझने और रोकथाम की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक आत्महत्या के मामले की विवेचना में अक्सर घटना के बाद का विश्लेषण भर किया जाता है, जबकि इस बार फोकस होगा उन परिस्थितियों पर, जो धीरे-धीरे व्यक्ति को इस कदम तक ले जाती हैं। आवश्यकतानुसार मनोविज्ञान विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की भी मदद ली जाएगी। आगामी दिनों में पुलिस गांवों और कस्बों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने की योजना भी बना रही है, ताकि लोग समय रहते तनाव और अवसाद से जूझ रहे व्यक्तियों की पहचान कर सकें और उन्हें सहायता दिला सकें। अधिकारियों का कहना है कि यदि आंकड़ों के पीछे छिपे वास्तविक कारण समझ लिए जाएं और समय रहते हस्तक्षेप कर दिया जाए, तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।
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वर्ष कुल मामले- महिला पुरुष
202129 11 18
2022 61 23 38
2023 69 25 44
2024 63 29 34
2025 70 36 34
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292 124 168
कोट.........
आत्महत्या करने वाले अवसादग्रस्त होते हैं। इनमें लो फ्रस्टेशन टालरेंस बढ़ जाता है। युवाओं में कुंठा को बर्दाश्त करने की क्षमता कम हो गई है। इसके पीछे सामाजिक दायरे का सीमित होना भी है। साथ ही रिश्तों में कमजोरी, मोबाइल की दुनिया में दिखने वाले स्टेटस से खुद की तुलना के चलते भी युवा अवसाद में चले जा रहे हैं। इससे निजात के लिए समाज को आगे आना होगा। साथ ही अवसादग्रस्त लोगों को काउंसिलिंग और दवा मदद से उबारा जा सकता है।
डॉ. तूलिका पांडेय, सहायक आचार्य मनोविज्ञान, संत विनोबा पीजी कॉलेज, देवरिया