देवरिया। लोकतंत्र सेनानियों के परिचय पत्र पर भी भगवा रंग चढ़ गया है। पहले उनके परिचय पत्र का रंग गुलाबी था। 11 साल बाद परिचय पत्र के रंग में हुए बदलाव को कुछ लोकतंत्र सेनानी इसे भगवाकरण से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ ने इसकी सराहना की है।
जिले में 144 लोकतंत्र सेनानी हैं, नौ उनकी विधवाएं हैं। इन्हें हर माह 15 हजार रुपये का पेंशन मिलता है। ये वे लोग हैं, जो इमरजेंसी के दौरान जेल गए थे। 2006 यूपी में सपा की सरकार बनने पर तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव ने इमरजेंसी में जेल जाने वाले राजनीतिक बंदियों को ‘लोकतंत्र सेनानी’ का दर्जा दिया था। साथ में तीन हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन की शुरुआत की थी। यूपी में बसपा की सरकार बनने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस पेंशन पर रोक लगा दी थी। लोकतंत्ररक्षक सेनानी संगठन के जिलाध्यक्ष सुभाष चंद्र उपाध्याय ने बताया कि पेंशन के रूप में मिल रहे सम्मान पर रोक के विरोध में संगठन हाईकोर्ट गया था। हाईकोर्ट ने लोकतंत्र सेनानियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके बावजूद पेंशन की शुरुआत नहीं हो पाई। लोकतंत्र सेनानियों के एक अन्य संगठन लोकतंत्र रक्षक सेनानी कल्याण समिति के जिलाध्यक्ष रमजान अली ने बताया कि यूपी में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनने पर न सिर्फ पेंशन बहाल की गई, बल्कि तीन हजार से पेंशन बढ़ाकर छह हजार रुपये कर दिया गया। इसके बाद 10 हजार, फिर 15 हजार रुपये पेंशन किया गया।
विधवाओं को भी मिला पेंशन का हक
पहले सिर्फ लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को ही पेंशन मिलता था। उनकी विधवा को पेंशन पाने का अधिकार नहीं था। लोकतंत्र सेनानी के संगठनों ने विधवा को पेंशन की मांग को लेकर लंबी लड़ाई लड़ी थी। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सेनानियों को पेंशन देने की घोषणा की थी। इसके बाद से लोकतंत्री रक्षक सेनानी के निधन के बाद उनकी विधवा को भी 15 हजार रुपये प्रतिमाह से पेंशन दिया जाने लगा। जिले में लोकतंत्र सेनानी की नौ विधवाओं को इस पेंशन का लाभ मिल रहा है।
योगी करेंगे लोकतंत्र सेनानियों का सम्मेलन
लोकतंत्र सेनानियों के परिचय पत्र का भगवाकरण करने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ लोकतंत्र सेनानियों का सम्मेलन करने वाले हैं। इसलिए नया परिचय पत्र जारी किया जा रहा है।