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किफायती आवास योजना में जमीन विवाद बना रोड़ा

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आवास योजना में जमीन विवाद बना रोड़ा
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देवरिया खास में बनने हैं 250 किफायती आवास
दो माह पूर्व भेजा गया था किफायती आवास प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। शहरी भूमिहीनों को कम कीमत पर सस्ता घर देने की सरकार की मंशा जिले में परवान नहीं चढ़ पा रही है। जिस भूमि पर 250 आवास बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था वह विवाद में उलझ गया है। जिम्मेदारों को तत्काल में विवाद निपटारे का कोई रास्ता भी नहीं सूझ रहा। लिहाजा कार्यदाई संस्था आवास विकास परिषद ने देवरिया के प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
लंबे समय से शहर में रहकर जीवन-यापन करने वाले भूमिहीन परिवारों का अपना घर हो इसके लिए सरकार ने किफायती आवास योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत आवास विकास परिषद शहर में या शहर से सटे जमीन का चयन कर फ्लैट का निर्माण कराता है। साढ़े चार लाख की लागत से तैयार हुए प्रत्येक फ्लैट महज दो लाख रुपये (जीएसटी अतिरिक्त) लेकर पात्रों को दिए जाते हैं। शहर में किफायती आवास बनाने की तैयारी करीब छह माह पहले की गई। देवरिया खास बाहर स्थित ग्रामसभा की भूमि का चयन कर जिला प्रशासन ने शासन को प्रस्ताव भेजा था। जमीन पर बीआरडीपीजी अपना मालिकाना हक जता रहा है। भूमि विवाद के चलते किफायती आवास बनाने प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई है।
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ढूंढे नहीं मिल रही जमीन
किफायती आवास बनाने के लिए कम से कम एक हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। जहां फ्लैट तैयार करने के अलावा अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित की जा सकें। जमीन शहर में या शहर से सटे होनी चाहिए। तभी असल हकदारों को लाभ मिल सकेगा। जिम्मेदारों को ढूंढे भी जमीन नहीं मिल पा रही।
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पांच हजार के करीब हैं किराएदार
शहर में किराए के मकान में रहकर गुजर बसर करने वाले परिवारों की तादात करीब पांच हजार हैं। इनमें सैकड़ों परिवार ऐसे हैं जिनके पास जमीन नहीं है। वह काफी दिनों से शहर में किराए पर रहकर जीवन-यापन करते हैं। ऐसे लोग किफायती आवास योजना को लेकर उम्मीद लगाए बैठे हैं।


देवरिया खास नगर बाहर की जमीन पर किफायती आवास बनाने के लिए दो माह पूर्व शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। जमीन विवाद आने के चलते काम प्रभावित है।
- मोहम्मद हाशिम इकबाल, एक्सईएन आवास विकास
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