मनरेगा की राशि गबन करने वाले 20 लोगों पर मुकदमा दर्ज
नौ फर्म को काली सूची में डालने एवं 31 लाख की वसूली का निर्देश
तत्कालीन खंड विकास अधिकारी, एई डीआरडीए के खिलाफ होगी कार्रवाई
मनरेगा में पौने दो करोड़ के भुगतान का हुआ खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। विकास खंड बनकटा में बिना कार्य कराए करोड़ों रुपये भुगतान के मामले में शनिवार को नौ ग्राम प्रधानों, छह ग्राम पंचायत सचिव और पांच तकनीकी सहायकों सहित 20 लोगों के खिलाफ डीसी मनरेगा गजेंद्र कुमार तिवारी ने बनकटा थाने में कूटरचित दस्तावेज तैयार करके शासकीय धन का गबन करने के मामले में केस दर्ज कराया है।
उधर मुख्य विकास अधिकारी ने विकास खंड की नौ फर्मों को काली सूची में डालने का आदेश दिया है। उन्होंने तत्कालीन खंड विकास अधिकारी एवं डीआरडीए के एई चंद्रभान सिंह के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को मेल किया है। वहीं जांच रिपोर्ट आने के बाद तकरीबन 31 लाख रुपये की वसूली के लिए आदेश जारी कर दिया गया है। मनरेगा में हुए खेल का खुलासा अमर उजाला ने 21 अप्रैल 2020 के अंक में प्रथम पेज पर किया था।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार अधिनियम (मनरेगा) से बिना निर्माण कार्य कराएं 31 मार्च को शासन से बजट आते ही आनन- फानन में तकरीबन एक करोड़ 70 लाख 29 हजार का 42 ग्राम पंचायतों में भुगतान कर दिया है। तत्कालीन खंड विकास अधिकारी का प्रभार देख रहे ग्राम्य विकास अभिकरण के एई चंद्रभान सिंह की शह पर ग्राम प्रधानों, सेक्रेटरी और तकनीकी सहायकों ने भुगतान की पत्रावली तैयार कराकर शासकीय राशि का खेल कर दिया। भुगतान के एक ही दिन बाद एक अप्रैल को एई चंद्रभान सिंह का स्थानांतरण भलुअनी विकास खंड हो गया। सूत्रों की मानें तो 31 मार्च को तीन करोड़ 59 लाख के भुगतान की तैयारी थी, लेकिन तकनीकी वजह से एक करोड़ 89 लाख रुपये का भुगतान रुक गया। इसकी भनक मुख्य विकास अधिकारी शिव शरणप्पा को लगी तो उन्होंने पूरे प्रकरण से डीएम अमित किशोर को अवगत कराया। साथ ही खंड विकास अधिकारी बनकटा सौरभ सिंह, खंड विकास अधिकारी रूद्रपुर कार्तिकेय मिश्रा, डीसी मनरेगा गजेंद्र कुमार तिवारी, लेखाधिकारी उद्यान विभाग देवेंद्र श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता आरईएस टीएन राय की एक टीम गठित कर जांच की जिम्मेदारी सौंप दी। जांच की भनक लगते ही ग्राम प्रधान साइड पर मैटेरियल गिराने में जुट गए। अधिकारियों ने भौतिक सत्यापन किया तो जहां मैटेरियल गिरा था, उसे क्लीन चिट दे दी गई। इसमें 17.33 लाख नियम विरुद्ध भुगतान करने एवं बिना कार्य कराएं 13.65 लाख का भुगतान करने के दोषी नौ ग्राम प्रधानों, छह सचिवों और पांच तकनीकी सहायकों पर केस दर्ज कराया गया है।
इन पर प्राथमिकी दर्ज
ग्राम प्रधान भवानी छापर के रमेश सिंह पर 3.23 लाख, बसरी के रमिता देवी पर 2.37 लाख, अहिरौली बघेल की पूनम देवी पर 4.71 लाख, रतसिया के राजेश प्रताप सिंह पर 3.56 लाख, भोपतपुरा की उषादेवी पर 5.56 लाख, नियरवा की कालपति देवी पर 82 हजार, रामपुर के मुन्ना पर 3.46 लाख, रामपुर बुर्जुग की राजकुमारी पर 46 हजार, सिरसिया बाबू के राजेश पर 3.35 लाख रुपये के गबन का केस दर्ज हुआ है। इसके अलावा ग्राम पंचायत सचिवों में चंद्रिका प्रसाद, तेज प्रताप , संजय यादव, बृहस्पति शुक्ला, मेहताब आलम, आलोक सिंह और तकनीकी सहायक अरविंद कुशवाहा, संजय सिंह, विनोद कुमार सिंह, उमेश यादव, धर्मेन्द्र उपाध्याय के नाम शामिल हैं।
नौ फर्मों को काली सूची में डाला, 31 लाख की होगी वसूली
देवरिया। बनकटा विकास खंड में मनरेगा के तहत हुए भुगतान के खेल में अहम भूमिका अदा करने की वजह से
तकनीकी सहायकों, मनरेगा के एपीओ, लेखाधिकारी को मुख्य विकास अधिकारी शिव शरणप्पा ने सेवा समाप्ति का नोटिस देकर सभी को मुख्यालय से अटैच कर दिया है। तत्कालीन खंड विकास अधिकारी एवं डीआरडीए के एई, विकास खंड के लेखाधिकारी के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गाज गिरनी तय है। उधर बनकटा विकास खंड में मैटेरियल की सप्लाई करने वाली नौ फर्मों को काली सूची में डाल दिया गया है। 31 लाख की जो गड़बड़ी जांच में मिली है, उसमें 33 प्रतिशत ग्राम प्रधान, 33 प्रतिशत ग्राम पंचायत सेक्रेटरी और 33 प्रतिशत तकनीकी सहायकों से वसूली करने के लिए आरसी जारी करने का पत्र भेज दिया गया है।