देवरिया। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही देवरिया ‘मिनी नगर निगम’ का रूप ले लेगा। शहर को विकसित और विस्तारित करने के लिए विकास प्राधिकरण बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। अभी यह शुरुआती रूप में है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो जिले से इसकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही है। जल्द ही इस पर बैठक कर मुहर लगा दी जाएगी। प्रस्तावित विकास प्राधिकरण में शहर से सटे आसपास के 100 से अधिक गांव शामिल किए जाएंगे।
गोरखपुर के बाद देवरिया इस मंडल का सबसे पुराना शहर है। अप्रैल 1946 में जनपद सृजन के बाद निकाय का गठन और फिर शहर के विकास की प्रक्रियाएं क्रमवार ढंग से जारी है। शहर के विकास को सुव्यवस्थित रूप देने के लिए 1983 में मास्टर प्लॉन तैयार किया गया। इसी प्लॉन के आधार पर अब तक शहर का विकास चलता आ रहा है। तीन दशक से अधिक समय में आबादी डेढ़ गुना हो चुकी है। दर्जनों नए आवासीय इलाके बढ़े हैं। चारों तरफ के गांव पूरी तरह शहर में सट चुके हैं। मगर वहां अब भी ग्रामीण सुविधाएं ही उपलब्ध हो पा रही हैं। उनके विकास के लिए कोई ठोस योजना नहीं है और न ही पर्याप्त फंड। सीमा विस्तार की मांग लंबे समय से उठती रही है, मगर ठोस पैरवी के अभाव में इसे गति नहीं मिल पा रही। पिछले दिनों ‘अमर उजाला’ ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इस पर प्रशासन भी गंभीर हुआ है। शहर के विस्तार व सुव्यवस्थित विकास के लिए इसे प्राधिकरण बनाने की कवायद शुरू की गई। देवरिया विकास प्राधिकरण के नाम से गठित होने वाले इस प्राधिकरण में आसपास के 100 से अधिक गांवों को समाहित किया जाएगा। प्राधिकरण के लिए सभी मानकों की गहराई से पड़ताल के बाद प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसे शासन को भेजा जा रहा है।
प्राधिकरण गठन से विकास को लगेंगे पंख
देवरिया विकास प्राधिकरण को मंजूरी मिली तो न सिर्फ शहर की तस्वीर बदलेगी, बल्कि आसपास के गांव भी संवरेंगे। नए आवासीय इलाके विकसित किए जाएंगे। चौड़ी सड़कें, शुद्ध पेयजल व्यवस्था, जलनिकासी के बेहतर प्रबंध के अलावा व्यावसायिक क्षेत्र में भी इजाफा होगा। पूरे मंडल में फिलहाल सिर्फ गोरखपुर में ही प्राधिकरण स्थापित है।
शासन के निर्देश पर विकास प्राधिकरण गठन की तैयारी चल रही है। प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्राधिकरण बनने से विकास के नए रास्ते खुलेंगे। फंड अधिक मिलेगा। शहर सुव्यवस्थित और सुंदर बनेगा। गांव भी संवरेंगे।
- सीताराम गुप्त, एडीएम।