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वेंटिलेटर पर जिला अस्पताल का सिस्टम

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नीलांबुज मिश्र
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देवरिया। जिला अस्पताल में रोगियों को इलाज के लिए जूझना पड़ता है। इसकी वजह जिम्मेदारों की लापरवाही और सिस्टम में कमी बताई जा रही है। घंटों इंतजार के बाद ओपीडी में डॉक्टर नहीं आए। इससे नाराज तीमारदारों और कंपाउंडर के बीच तकरार हुई। सीएमएस तक मामला पहुंच तो आनन-फानन मेें डॉक्टर पहुंचे। वहीं बेड के अभाव में फर्श और कुर्सी पर रोगियों को लिटा कर इलाज किया जा रहा है।
योगी सरकार में बेहतर इलाज देने की सुुविधा बेमानी साबित हो रही है। जिला अस्पताल पहुंच रहे रोगियों को इलाज के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। मंगलवार को 1360 लोगों ने इलाज के लिए पर्ची बनवाया। सुबह आठ बजे ओपीडी में पर्ची जमा कर रोगी डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे। दिन में करीब 12 बजे तक कक्ष संख्या आठ और 10 में कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा था। पांडेयपुर गांव के शंभूनाथ मौर्य, बांसघाटी के संतोष कुमार, भटनी के अतुल, सोहनीपार की सुनीता आदि नेे बताया कि सुबह आठ बजे से डॉक्टर का इंतजार किया जा रहा है। कई बार सीएमएस से भी कहा गया, लेकिन कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा। इससे नाराज लोगों ने डॉक्टर के कंपाउंडर को खरी-खोटी सुनाई। इसके बाद डॉ. एसके मिश्र पहुंचे और ओपीडी शुरू हुई। भीड़ अधिक होने के कारण तीन बजे के बाद पहुंचे लोगों का ओपीडी में पर्ची जमा करने से कंपाउंडरों ने इनकार कर दिया। सीएमएस डॉ. केसी राय ने बताया कि कुल 21 डॉक्टर इन दिनों हैं। करीब दस डॉक्टरों का पद रिक्त है। डॉ. डीके सिंह के छुट्टी पर होने से दिक्कत हो रही है। राउंड के कारण डॉ. एचके मिश्रा विलंब से ओपीडी में गए।
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बेटी ने हंगामा किया तो पिता को मिला बेड
कसली गांव निवासी 70 वर्षीय श्रीप्रकाश मिश्र को उल्टी-दस्त हो रही थी। बुजुर्ग पत्नी बदामी देवी इमरजेंसी में लेकर सुबह नौ बजे पहुंची। डॉक्टर नेे देखने के बाद दवा दिया और बेड नहीं होने की बात कह फर्श पर लेटने को कहा। करीब तीन बजे बेटी जयंती पहुुंचीं और फर्श पर पिता को लेटा देखा तो हंगामा करने लगी। मामला बढ़ता देख बेड उपलब्ध कराया गया।

एक्सरे के नाम पर हो रही वसूली
जिला अस्पताल में मेडिकोलिगल के लिए एक्सरे के नाम पर धनउगाही की जा रही है। मंगलवार को प्रतापपुर से आए अशोक यादव, राजकिशोर से लैब टेक्नीशियन ने 270 रुपये लिए। कोइलगढ़वा गांव की रूक्मिणी देवी से 150 रुपये वूसला गया। लोगों ने विरोध किया तो टेक्नीशियन विनय श्रीवास्तव ने रकम वापस किया। वसूली का यह खेल जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. केेसी राय के सामने हो रहा है। वसूली की बात उन तक पहुंची तो चुप्पी साध ली।
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इमरजेंसी में नहीं है इंजेक्शन
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इंजेक्शन और आईटी कीट नहीं है। इमरजेंसी में आने वालों को बाजार से यह खरीदना पड़ रहा है। ओपीडी के चिकित्सकों ने इसकी जानकारी सीएमएस को दी है। शाम तक यह उपकरण उपलब्ध नहीं हो सका था।
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