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विश्व विजय त्रिपाठी।
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रुद्रपुर। नए शिक्षा सत्र के चार माह बीतने के बाद भी परिषदीय स्कूलों के बच्चों में करीब 60 प्रतिशत किताबें नहीं बंट पाई हैं। ब्लॉक क्षेत्र के 180 परिषदीय स्कूलों के करीब 14 हजार बच्चे पुरानी पुस्तकों से पढ़ रहे हैं। शासन के एक जुलाई तक हर बच्चे के हाथ में नई पुस्तक देने दावा हवाहवाई साबित हुआ। ऐसे में स्कूलों में बच्चों पुरानी फटी किताबों से अगस्त माह में होने वाली तिमाही परीक्षा की तैयारी में लगे हैं।
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ब्लॉक संसाधन केंद्र पर अब तक दो खेप किताबें पहुंच पाई हैं। जो स्कूल के बच्चों के हाथों तक नहीं पहुंची। प्राइमरी की कक्षा एक में कलरव और कक्षा दो में कलरव, गिनतारा की किताब लगती है। जिसमें से बीआरसी पर कलरव की ही किताब ही आई है। कक्षा तीन और चार में पढ़ाई जाने वाली कलरव, गिनतारा, रैनबो, संस्कृत पीयूषम, हमारा परिवेश और परख पुस्तक में से बच्चों में बांटने के लिए संस्कृत पीयूषम, रैनबो और कलरव ही आया है। जबकि कक्षा पांच के छात्रों को पढ़ाने के लिए एक भी पुस्तक नहीं आई है। जूनियर की कक्षाओं में मंजरी, गणित, आओ विज्ञान सीखे, हमारा इतिहास, नागरिक जीवन, पृथ्वी और हमारा जीवन, रैनबो, गृह शिल्प, कृषि विज्ञान, वर्तिका, खेल और स्वास्थ्य पुस्तकें पढ़ाई जाती है। जूनियर में पढ़ाई जाने वाली दस किताबों में से छह किताबें ब्लॉक संसाधन केंद्र पर पहुंची है। एक सप्ताह से शिक्षामित्रों के आंदोलन से क्षेत्र के 24 स्कूलों पर ताला लटक रहा है। इन स्कूलों नामांकन हुए बच्चों तक किताबें तक नहीं पहुंच पाई। इस बाबत खंड शिक्षाधिकारी वंशीधर श्रीवास्तव ने कहा कि किताबों को स्कूलों तक भेजा जा रहा है। शेष पुस्तकें तभी जिले से मिलते ही स्कूलों पर भेज दी जाएंगी।
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