सच्चिदानंद पांडेय
बरहज। हम चले लंबे सफर को अलविदा ए दोस्तों, मौज ए दरिया में बहो तुम अलविदा ए दोस्तों..., असो आईल महुआबारी में बहार सजनी, एगो दीया जरेला जवन कहियो न बुताय जवन परे न लखाय..., मृग तृष्णा से नाचत बाटे घाम रे हिरन बा पियासा, जेठ की दुपहरी में रेत के बा आसा... और यह रस के स्वाद ओही के मिलेला जे खुद कड़ाही के साथ खउलेला.. आदि भोजपुरी कविता और गीतों के जरिए रुपहले पर्दे पर धमाल मचा देने वाले बरहज के ‘मोतीलाल बीए’ भोजपुरी का मान बढ़ाने वाले पहले शख्स हैं। उन्होंने 1944 से 52 तक फिल्मी दुनिया के करीब 80 फिल्मों में भोजपुरी गीत लिखा है।
तहसील क्षेत्र के बरेजी गांव निवासी स्व. राधाकृष्ण उपाध्याय और कौशिल्या देवी के तीन संतानों में दूसरे नंबर के बेटे मोतीलाल बीए का जन्म एक अगस्त-1919 को हुआ था। गांव से प्रारंभिक शिक्षा के बाद 1934 में नगर के किंग जार्ज इंटर कॉलेज से हाईस्कूल, 1936 में गोरखपुर से इंटर, 1939 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद 1943 तक विभिन्न समाचार पत्रों में पत्रकारिता और संपादकीय विभाग में कार्यरत रहे। 1944-51 तक पंचोली आर्ट्स पिक्चर्स लाहौर फिल्मीस्तान लिमिटेड बंबई, प्रकाश पिक्चर्स बंबई में गीतकार के रूप में नदिया के पार, साजन, सिंदूर, रिमझिम, सुभद्रा आदि फिल्मों के गीत लेखन का कार्य किए हैं। फिल्म जगत में सर्वप्रथम ‘नदिया के पार’ के सभी गीतों का भोजपुरी में लेखन कार्य किए थे। कठवा के नइया बनइह मल्लहवा, मोरे राजा हो ले चल नदिया के पार, साजन फिल्म के प्रसिद्ध गीत तुम हमारे हो न हो आदि गीतों को लोग आज भी गुनगुनाते हैं। भोजपुरी फिल्म गजब भइल रामा, चंपा-चमेली, ठकुराइन आदि फिल्मों में गीत लेखन के साथ अभिनय भी किया है।
स्वाधीनता की लड़ाई में हुए थे नजरबंद
लेखनी के धनी मोतीलाल बीए का स्वाधीनता की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अंग्रेज सरकार ने 1943 में भारत रक्षा कानून के अंतर्गत सेंट्रल जेल में उन्हें नजरबंद किया था।
चुका है।