देवरिया। कमाऊ पटल के लिए जोड़तोड़ कोई नई बात नहीं है। अब तो मंदिर से सीधे फोन कराया जा रहा है। कलेक्ट्रेट में साहूकारी पटल पर रह चुका एक बाबू इन दिनों पुरानी कुर्सी हथियाने के लिए लगातार दबाव बनवा रहा है। इससे अधिकारी परेशान हैं तो कलेक्ट्रेट में चर्चा का विषय बना है।
एक ही पटल पर लंबे वक्त से जमे बाबुओं को हटाने की मांग कोई नई नहीं है। अक्सर इसको लेकर राजनीतिक दल के नेता आवाज बुलंद करते रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग में तो एक ही पटल पर तीन साल से अधिक समय से जमे लिपिक को हटाने का निर्णय भी हो गया है। इस बाबत कार्मिक विभाग की वार्षिक स्थानांतरण नीति 2017-18 के अनुसार निदेशक प्रशासन अजीत कुमार ने सभी सीएमओ को पत्र लिखकर आदेश भी दिया है। कृषि विभाग में कुछ बाबू एक ही पटल पर कई वर्षों से हैं। यदि इनका पटल बदला भी जाता है तो नेता या अफसरशाही का जुगाड़ लगाकर पुरानी कुर्सी हथियाने में कामयाब हो जाते हैं। चूंकि ये बाबू एक ही पटल लंबे समय से देखने के नाते हर बारीकियों से वाकिफ हो जाते हैं, इसलिए जनता को एक ही काम के लिए कई चक्कर काटने पड़ते हैं। जबकि सरकार सरकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार रोकने का दंभ भर रही है। इतना ही नहीं, कमाऊ सीट हासिल करने के लिए बाबू एक-दूसरे की काट करने से भी बाज नहीं आते। कुछ ऐसा ही इन दिनों कलेक्ट्रेट में चल रहा है। साहूकारी पटल के लिए एक बाबू खूब जोर लगाए हुए है। जबकि यह बाबू दो बार इस सीट पर रह चुका है। तत्कालीन जिलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र ने इस बाबू को हटा दिया था। इसके बाद फिर वह सीट हथियाने में कामयाब हो गया। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी अनीता श्रीवास्तव ने शिकायत मिलने पर उसे सीट से हटा दिया। सत्ता बदलते ही यह बाबू फिर पुरानी सीट हासिल करने के लिए सक्रिय हो गया है। सूत्र बताते हैं कि उक्त बाबू की मंदिर में पकड़ है। एडीएम वित्त एवं राजस्व सीताराम गुप्ता ने बताया कि ऐसी बात नहीं है। उनके पास मंदिर से फोन नहीं आया है। यदि डीएम के पास आया होगा, तो वही बता पाएंगे।