फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीन महीने में 635 गांवों में बिजली की रोशनी पहुंचाना चुनौती

विज्ञापन
विज्ञापन
635 टोलों तक बिजली पहुंचाना चुनौती
विज्ञापन


कार्यदाई संस्थाओं की सुस्ती से पिछड़ रहा विद्युतीकरण का कार्य
चार साल बीतने के बाद भी ग्राम ज्योति योजना नहीं हुआ पूरा
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। विद्युत विहीन मजरे और टोलों मेें विद्युतीकरण करना अधिकारियों के लिए चुनौती बन गई है। 635 मजरे के लोगों को अभी भी बिजली की रोशनी का इंतजार है। यहां अब तक विद्युतीकरण का कार्य शुरू ही नहीं हो सका है। जिन 6376 गांवों में विद्युतीकरण हुआ है, उनमें भी अधिकांश जगह आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। काम की सुस्ती और विभागीय उदासीनता के कारण दिसंबर तक हर गांव में बिजली पहुंचाने के लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा। विद्युतीकरण का जिम्मा संभाल रहे एलएनटी कंपनी और पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड के जिम्मेदार सिर्फ कागजों में उलझे हुए हैं। अभी तक जिले में 250 करोड़ से अधिक रुपये इस योजना पर खर्च हो चुके हैं।
केंद्र सरकार की पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत जिले के वंचित गांवों और मजरों में बिजली पहुंचाने की कवायद शुरू है। बिजली निगम के अनुसार जिले के 2017 गांवों के 6011 टोले विद्युतीकरण से वंचित हैं। इसकी जिम्मेदारी एलएनटी कंपनी और पॉवर कॉरपोरेशन को दी गई है। केंद्र सरकार के चार साल पूरा होने के बावजूद अभी भी 635 मजरे बिजली की रोशनी से कोसों दूर हैं। बिजली निगम ने ऐसे 3700 गांवों का सर्वे कराया था, जिसमें विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया था, मगर इनमें भी मात्र 500 गांवों में ही बिजली आपूर्ति शुरू हो सकी है। अन्य गांवों में आंशिक विद्युतीकरण का कार्य चल रहा है। दिसंबर तक वंचित गांवों में विद्युतीकरण की डेडलाइन तय है। विद्युतीकरण कर रही कार्यदाई संस्था के वर्कर और विभागीय जिम्मेदार इसे लेकर तेजी नहीं बरत रहे हैं। इस योजना पर 250 से अधिक रुपये अभी तक खर्च हुए हैं। इसके पूर्व 11वीं और 12वीं राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। बावजूद गांवों के विद्युतीकरण की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
विज्ञापन



500 गांवों में शुरू हो गई आपूर्ति
कार्यदाई संस्था की ओर से जिन गांवों में विद्युतीकरण करा दिया गया है, उसमें अधिकांश गांवों में विद्युत कनेक्शन नहीं जोड़ा गया है। इसकी वजह एक पोल से पांच बिजली का कनेक्शन होना अनिवार्य बताया जा रहा है। ऐसा नहीं होने पर कराए गए विद्युत कार्यों को बिजली निगम अपने अभिलेखों में अधूरा मान रही है। इस लिहाज से चार सालों में सिर्फ 500 गांवों में ही विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो सका है। अन्य गांवों में कार्य प्रगति पर है।


नगर में वंचित लोगों के लिए नहीं है कोई योजना
गांवों में बिजली से वंचित लोगों तक बिजली पहुंचाने के लिए निगम के पास सिर्फ योजना है। नगरीय क्षेत्र में अगर बिजली से वंचित कोई टोला या मजरा है तो वहां पर विद्युतीकरण कराने के लिए विभाग के पास कोई व्यवस्था नहीं है। इसके लिए किसी जनप्रतिनिधि या उपभोक्ताओं को खर्च बहन करना पड़ेगा।
विज्ञापन


* 2017 गांव जिले में हैं।
* 54 विद्युत उपकेंद्र जिले में हैं।
* 6011 टोले सर्वे में मिले से विद्युतीकरण से वंचित।
* 6376 गांवों में कार्य आंशिक रुप से बाकी।
* 635 गांवों में अभी तक शुरू नहीं हुआ विद्युतीकरण कार्य।

कार्यदाई संस्थाओं को कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है। दिसंबर तक कार्य हर हाल में पूर्ण करना है। नगरीय क्षेत्र में विद्युतीकरण के लिए कोई योजना नहीं है।
- जेके शर्मा, अधीक्षण अभियंता, विद्युत निगम।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें