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चार माह से सीएचसी पर बंद है खून की जांच

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देवरिया। जिले के 17 सीएचसी पर होने वाली खून की जांच की सुविधा चार माह से बंद है। जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी उजागर होने और भुगतान के लिए गलत बिल प्रस्तुत किए जाने पर स्वास्थ्य विभाग ने भुगतान पर रोक लगा दी है। इस वजह से लोगों को खून की जांच के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है।
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प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने सभी सीएचसी केंद्रों पर खून की संपूर्ण जांच की व्यवस्था लागू करने का ऐलान किया था। इसके लिए जिले में कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर को जिम्मेदारी मिली थी। अप्रैल 2017 से एजेंसी ने जिले के 17 सीएचसी पर जांच का कार्य शुरू किया। इसके लिए सभी अस्पतालों पर एजेंसी के एक-एक वर्कर की तैनाती की गई। सीएचसी पर होने वाले सामान्य जांच के अलावा 23 तरह की जांच की जिम्मेदारी एजेंसी को दी गई थी। वर्कर मरीजों का ब्लड सैंपल जांच के लिए गोरखपुर भेजते थे। जांच रिपोर्ट दो दिन बाद मिलती थी।
शुरुआती दौर से रुद्रपुर, गौरीबाजार और लार सीएचसी केंद्रों पर एजेंसी की ओर से एक भी जांच नहीं की गई। इसकी रिपोर्ट भी सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षकों ने सीएमओ को भेजा है। सूत्रों की मानें तो शुरुआत से पिछले माह तक एजेंसी की ओर से किसी भी सीएचसी, पीएचसी पर नियमित रूप से ब्लड की जांच नहीं हुई है। कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर की लापरवाही उजागर होने के बाद सीएचसी पर इसकी ओर से होने वाली खून की जांच बंद करा दी गई। इस बाबत सीएमओ डॉ. रामनिवास ने बताया कि एजेंसी ने जो रिपोर्ट दी थी, उसमें अधिकांश गलत थी। इसकी वजह से भुगतान फंसा हुआ है। 40 प्रतिशत की कटौती कर शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है।
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एजेंसी को मिली है इन जिलों की जिम्मेदारी
कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर को प्रदेश के अंबेडकरनगर, बाराबंकी, सुल्तानपुर, बहराइच, मऊ, गोंडा, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, अमरोहा, बागपत, बिजनौर, गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बस्ती, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज, हरदोई, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, रायबरेली, सीतापुर, अलीगढ़, बदायूं, बुलंदशहर, बरेली जिले के सीएचसी व पीएचसी केंद्रों पर जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
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