देवरिया। रविवार को करवा चौथ है। महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। हिंदू शास्त्रों में करवा चौथ के व्रत को सुहागिनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्रत माना गया है। करवा चौथ का यह व्रत कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखकर रात में चांद दिखते ही अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग जगहों पर करवा चौथ की पूजन विधि अलग-अलग होती है। इस व्रत को रखने से एक दिन पहले महिलाएं हाथों में मेंहदी रचाती हैं। ज्यादातर महिलाएं अपने घर की परंपराओं और रीति रिवाजों के अनुसार पूजा करती हैं और कहानी सुनती हैं। ऐसा माना जाता है कि करवा चौथ के दिन किसी भी सुहागन को बुरा-भला कहने के अलावा उसे शाप देने की गलती बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए। रविवार को पड़ने वाले इस व्रत की तैयारी में सुहागिनें लगी थी। व्रत और पूजा में उपयोग होने वाले जरूरी सामानों की शनिवार को खरीदारी की गई। ब्यूटी पार्लर में महिलाओं की भीड़ रही। शास्त्रों में बताया गया है कि अविवाहित युवतियां भी अपने होने वाले पति के लिए यह व्रत रख सकती हैं। हालांकि वास्तव में ऐसा बहुत कम होता है।
करवा चौथ पर न करें यह काम
पति की लंबी आयु की कामना के लिए रखे जाने वाले इस व्रत पर सुहागिनों को यह ध्यान रखना चाहिए कि सुहाग सामग्री यानी चूड़ी, लहठी, बिंदी, सिंदूर को कचड़े में बिल्कुल ना फेंके। इतना ही नहीं अगर चूड़ी पहनते वक्त टूट जाए तो उसे संभालकर पूजा स्थान पर रख दें। सुहागिनें इस बात का खास ध्यान रखें कि सिलाई, कटाई, बुनाई के लिए कैंची, सुई, चाकू का इस्तेमाल कदापि न करें।