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जेई/एईएस से बचाव के लिए जमीनी स्तर पर खानापूर्ति

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देवरिया। जिले के जेई/एईएस प्रभावित गांवों में एंटी लार्वा, मैलाथियान की फागिंग नहीं हो रहा है। इसकी वजह ग्राम स्वच्छता समिति के संयुक्त बैंक अकाउंट में रकम का नहीं होना बताया जा रहा है। मलेरिया विभाग गांवों में एंटी लार्वा का छिड़काव होने का जहां दावा कर रहा है, वहीं जमीनी हकीकत कागजी आंकड़ों से दूर है। ऐसे में जलजनित बीमारियों पर काबू पाना आसान नहीं है।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से जेई/एईएस प्रभावित गांवों में एक माह में चार बार एंटी लार्वा का छिड़काव और फागिंग कराना है। दो विभागों में खींचतान के चलते यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है और आंकड़ों की बाजीगरी में फंस कर रह गई है। जनपद में एक जनवरी-2017 से अब तक 305 जेई/एईएस के रोगी मिले हैं। इसमें इलाज के दौरान 18 बच्चों की मौत हो गई है। मलेरिया विभाग ने 163 गांवों को चिह्नित किया है जो अति संवेदनशील है। सभी सीएचसी पर एंटी लार्वा और मैलाथियान छिड़काव के लिए भेज दिया है। छिड़काव का कार्य ग्राम स्वच्छता निधि में आने वाले दस हजार रुपये से किया जाता है। इसका बैंक अकाउंट एएनएम और प्रधान का संयुक्त होता है। दो विभागों का ज्वाइंट अकाउंट होने के कारण खींचतान के चलते अधिकांश गांवों में छिड़काव नहीं हो सका है। वर्तमान में अधिकांश गांवों के ग्राम स्वच्छता निधि में रकम नहीं है। ऐसे में एंटी लार्वा का छिड़काव प्रभावित है। विभागीय अफसर प्रभावित 150 गांवों में फागिंग और 350 गांवों में एंटी लार्वा का छिड़काव होने का दावा कर रहे हैं। जिला मलेरिया अधिकारी एसपी तिवारी ने बताया कि चिह्नित गांवों में फागिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर क्या दिक्कत है। इसे पता लगाया जाएगा।

अधिकांश गांवों में धन की कमी
देवरिया। वर्ष 2015 में पंचायतराज विभाग के चुनाव में जिन गांवों का मजरा अलग था उनको वोटरों की संख्या के आधार पर अलग ग्रामसभा बना दिया गया। जिले में 30 से अधिक नए ग्रामसभा बनाए गए। इन गांवों में पिछले सत्र में ग्राम स्वच्छता निधि के तहत एक भी रुपये नहीं आया था और इस सत्र में वही हाल है। अन्य गांवों के बैंक अकाउंटों में रकम नहीं पहुंच सका है।
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खरीद लिया कुर्सी और मेज
ग्राम स्वच्छता निधि में आने वाले दस हजार रुपये से गांवों की सफाई और छिड़काव कराना प्राथमिकता है, लेकिन कुछ माह पूर्व वजन दिवस के लिए चलाए गए कार्यक्रम में अफसरों के दबाव पर प्रधानों ने वजन मशीन और कुर्सी मेज खरीद लिए। इसके चलते फागिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं हो सका।

मानक के अनुसार नहीं हो रहा फागिंग
वर्ष 2016 में जेई/एईएस के 625 मरीज मिले थे। उस समय भी एंटी लार्वा छिड़काव के लिए जोर दिया गया था। लेकिन सफलता नहीं मिली और योजना लापरवाही की भेंट चढ़ी। ग्रामसभा के बजाए सिर्फ स्वास्थ्य विभाग को इसकी जिम्मेदारी मिले तो शायद मानक के अनुसार सभी गांवों में फागिंग हो सकता है।
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