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बहादुर बेटियों के बदौलत समाज में हो रहा बदलाव

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पुलिस पाठशाला में स्वागत गीत प्रस्तुत करती छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
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सलेमपुर। सेंट जेवियर्स स्कूल में शनिवार को ‘अमर उजाला’ के ‘अपराजिता’ अभियान के तहत पुलिस की पाठशाला आयोजित हुई। छात्राओं को उनकी क्षमता की याद दिलाते हुए पुलिस के अफसरों ने उन्हें सुरक्षा के प्रति आश्वस्त किया। कहा कि वह निर्भीक होकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ें, अगर कोई रुकावट डालता है तो उसकी सूचना देने में न हिचकें।
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मुख्य अतिथि कोतवाल सीपी जैसल ने कहा कि बेटियां बहादुर हैं। पुलिस हर वक्त उनके साथ खड़ी है। बस सूचना देने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा से पीड़ित 181 डायल कर मदद ले सकती हैं। उन्होंने छात्राओं को साइबर क्राइम से बचने की भी सलाह दी। कहा कि महिलाएं सशक्त हैं, अब उन्हें डरने की जरूरत नहीं। बहादुर बेटियां अगर घूर भर दें तो किसी की हिम्मत नहीं जो उनके पास फटक सके। कहीं-कोई परेशानी हो तो तुरंत 1090 डॉयल करें। यहां सभी जानकारियां गोपनीय रखी जाती हैं। एंटी रोमियो प्रभारी अनूप तिवारी ने कहा कि मां से अच्छा कोई दोस्त नहीं है। उनसे कोई बात नहीं छुपानी चाहिए। आत्मनिर्भर बनें और पुलिस की मदद लें। प्रधानाचार्य बीके शुक्ल ने कहा कि बेटियों के प्रति समाज का नजरिया बदल रहा है। ‘अमर उजाला’ का यह अभियान बेटियों को स्वावलंबी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। पाठशाला में छात्राओं ने कोतवाल से कई सवाल भी पूछकर अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया। इससे पूर्व छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस दौरान गोपाल त्रिपाठी, प्रेमशंकर सिंह, विवेकानंद तिवारी, सुभद्र शर्मा, प्रतिभा सिंह, सुमन तिवारी, मीना चौरसिया व दुर्गेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।


घर से स्कूल तक बेटियों को विकट हालात का सामना करना पड़ता है। कभी अपने सौतेला व्यवहार करते हैं तो कभी असामाजिक तत्व। फिर भी बेटियां अपने हौसले से सफलता हासिल कर रही हैं। इन जानकारियों से काफी मदद मिलेगी।
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- पूजा गुप्ता

तमाम परिवारों में अब भी बेटी के साथ भेदभाव होता है। पढ़ाई में बेटों को प्राथमिकता दी जाती है। इस सोच में बदलाव के लिए सबसे पहले लड़कियों को ही अपने अधिकार की जानकारी होनी चाहिए। वह इसके इस्तेमाल के प्रति सजग रहें।
- नेहा सिंह

कार्यक्रम में मिली कानूनी जानकारी से उसका हौसला और आत्मविश्वास बढ़ा है। अब रुकना नहीं, आगे बढ़ना है और बढ़ते जाना है। अपराजिता अभियान बेटियों को निडर और आत्मनिर्भर बनने में मददगार होगा। हम इसके सहभागी बनेंगे।
- जिज्ञासा श्रीवास्तव

बेशक अब माहौल बदल रहा है। बेटियां जागरूक बनकर हिम्मत और हौसले से आगे बढ़ रही हैं। परिवार की सोच भी बदली है। बेटियां बड़ी होकर दो घरों की जिम्मेदारी उठाती हैं। उन्हें फैसला लेने का अधिकार मिलना चाहिए।
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- आलिया परवीन
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