शिक्षकों के गले की फांस बना फर्जी नामांकन
स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान उपस्थिति कम मिलने पर रोका वेतन
बीएसए ने 13 ब्लॉकों के बीईओ को पत्र जारी कर दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। छात्र संख्या बढ़ाने के लिए स्कूलों में बच्चों का फर्जी नामांकन अब शिक्षकों के ही गले की फांस बन गया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत हुए स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान स्कूलों में नामांकन के सापेक्ष बच्चों की उपस्थिति बेहद कम मिली है। कमिश्नर की नाराजगी के बाद बीएसए ने 13 ब्लॉकों के स्कूलों में कार्यरत प्रधानाध्यापकों के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी है। संबंधित बीईओ को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि इन स्कूलों में प्रधानाध्यापक का वेतन तब तक आहरित नहीं किया जाएगा, जब तक स्वास्थ्य विभाग की टीमें शत प्रतिशत स्वास्थ्य परीक्षण न कर लें। पूरे जिले में ऐसे 100 से भी अधिक स्कूल हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर खसरा और रूबेला टीकाकरण अभियान को लेकर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। अभियान की सफलता के लिए विभागीय टीम स्कूलों में जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है। बीते पांच नवंबर को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भी टीम परीक्षण के लिए पहुंची तो बच्चों की उपस्थिति देख दंग रह गई। अमूमन सभी स्कूलों में नामांकन के सापेक्ष बच्चों की उपस्थिति बेहद कम थी। कई स्कूलों में 20-25 फीसदी बच्चे ही मौजूद मिले हैं। अधिकतम उपस्थिति 55 फीसदी से नहीं रही। स्वास्थ्य विभाग की इस रिपोर्ट के बाद कमिश्नर ने कड़ी नाराजगी जताते हुए बेसिक शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया था। अब बीएसए ने बीईओ के माध्यम से स्कूलों के प्रधानाचार्य के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी है। पत्र के तहत बीएसए माधवजी तिवारी ने कहा है कि जहां भी उपस्थिति 90 प्रतिशत से कम है, उनके प्रधानाचार्यों का वेतन तब तक आहरित न कराया जाए जब तक बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत टीमें वहां के बच्चों का शत प्रतिशत स्वास्थ्य परीक्षण न कर लें।
इन ब्लॉकों के बीईओ को निर्देश
16 ग्रामीण और एक शहरी शिक्षा क्षेत्र वाले जिले में कुल 13 ब्लाकों के बीईओ को बीएसए ने पत्र लिखा है। इसमें बरहज, पथरदेवा, तरकुलवा, बैतालपुर, लार, भटनी, रुद्रपुर, बनकटा, देवरिया सदर, रामपुर कारखाना, देसही देवरिया, गौरी बाजार, भागलपुर ब्लॉक शामिल है।