दोना-पत्तल बनाएंगी मुसहर महिलाएं
मुसहर ग्राम विकास योजना के तहत दिया जाएगा प्रशिक्षण
छह ब्लॉकों में गठित किए गए 25 स्वयं सहायता समूह
बैकुंठनाथ शुक्ल
देवरिया। महिला सशक्तिकरण की रेस में अब मुसहर बस्ती की महिलाएं भी शामिल होंगी। मुसहर ग्राम विकास योजना के तहत मुसहर समुदाय की महिलाओं को दोना पत्तल बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यकुशलता ठीकठाक रही तो एनआरएलएम की ओर से इन्हें दोना-पत्तल बनाने की मशीन और बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा।
ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से महिला सशक्तिकरण को लेकर तमाम तरह की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। तमाम महिलाएं समूह के माध्यम से एलईडी उपकरण बनाने से लगायत फल व सब्जी उत्पादन कर खुद की आमदनी बढ़ा रही हैं। एनआरएलएम की योजनाओं का लाभ ज्यादातर शिक्षित महिलाओं को ही मिल पाता था। मुसहर बस्तियों की निरक्षर महिलाएं लाभ से वंचित रह जाती थीं। उनके उत्थान के लिए सरकार ने मुसहर ग्राम विकास योजना की शुरुआत की है। इसके तहत विभिन्न ब्लॉकों से 13 गांवों का चयन कर 25 स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं। समूह की महिलाएं पत्ते जुटाकर दोना और पत्तल बनाएंगी। इसके लिए आरएसईटीआई संस्था बस्तियों में जाकर महिलाओं को पारंगत करेगी। दस दिन के प्रशिक्षण के बाद समूह को मशीन उपलब्ध कराया जाएगा। मशीन के जरिए महिलाएं आकर्षक डिजाइन में अपने उत्पाद तैयार कर सकेंगी।
ऐसे होगी मशीन की खरीद
पत्तों से दोना पत्तल तैयार करने के लिए महिलाओं को मशीन की आवश्यकता होगी। इसकी खरीद के लिए समूह को पांच लाख रुपये लोन लेने होंगे। एनआरएलएम के कर्मचारी स्थानीय बैंकों से संपर्क कर लोन मुहैया कराएंगे। लोन के ब्याज व मूलधन की भरपाई स्वयं सहायता समूह की महिलाएं उत्पाद बेचकर करेंगी।
यहां बनाए गए इतने समूह
रुद्रपुर ब्लाक के एकला मिश्रौलिया में पांच, सदर ब्लॉक के बैकुंठपुर में तीन, महुई में एक, पथरदेवा के आनंदनगर में दो, सेमरी में दो, सुंदरपुर में एक, मलवावर में दो, मस्जिदिया में एक, उदयपुरा में दो, तरकुलवा के नरायणपुर में एक, भटनी ब्लाक के भरहे चौरा में एक, रामपुर कारखाना के आमघाट एक, नौतन में चार स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं।
मुसहर ग्राम विकास योजना के तहत 13 बस्तियों को संतृप्त किया जा रहा है। इनमें 25 स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं। सभी को 15 हजार रुपये की दर से रिवाल्विंग फंड जारी कर दिया गया है। अगले महीने महिलाओं को आरएसईटीआई संस्था द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।
-अरविंद सिंह, मिशन प्रबंधक ग्रामीण आजीविका मिशन।