गौरीबाजार। बंद पड़ी गौरीबाजार चीनी मिल प्रबंधन की ओर से कबाड़ काटने आए श्रमिकों और मिलकर्मियों के बीच गुरुवार की सुबह जमकर नोकझोंक हुई। मिलकर्मियों और किसानों के विरोध के कारण कबाड़ी श्रमिक भागने पर विवश हो गए।
कानपुर शुगर वर्क्स गौरीबाजार चीनी मिल इकाई आठ मार्च-1996 को अनिश्चितकालीन ब्रेकडाउन के बाद बंद कर दी गई। कुछ वर्षों पहले इस चीनी मिल को राजेंद्र इस्पात प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता ने 17 करोड़ में खरीद लिया। इस चीनी मिल पर किसानों का एक करोड़ 62 लाख तथा मिलकर्मियों का 21 करोड़ से अधिक का बकाया है। बकाया भुगतान को लेकर मिल प्रबंधन एवं किसानों में श्रमिकों के बीच तनावपूर्ण बनी है। किसानों का कहना है कि बिना बकाया दिए किसी भी कीमत पर कबाड़ नहीं उठाने देंगे। गुरुवार की सुबह मिल प्रबंधक की ओर से कोलकाता से आए दो दर्जन श्रमिकों को देखते ही उनका गुस्सा फूट पड़ा। संपूर्ण क्षेत्र में माइक जरिए इसकी सूचना प्रसारित कर किसान तथा मिलकर्मियों से मिल गेट पर एकत्र होने की अपील की गई। सूचना पाकर किसान और कर्मचारियों की जुटान हो गई। बैठक को संबोधित करते हुए श्रमिक नेताओं ने किसानों एवं श्रमिकों की इस दुर्दशा के लिए शासन तथा प्रशासन को दोषी ठहराया। इस दौरान मुकुल सिंह, रमाशंकर सिंह, ऋषिकेश यादव, रवींद्रनाथ जायसवाल आदि मौजूद रहे।