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मजदूरों की जबरन बेदखली करना मानवाधिकार का उल्लंघन

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मजदूरों की जबरन बेदखली करना मानवाधिकार का उल्लंघन
कलेक्ट्रेट परिसर में विस्थापित, बेघर, भूमिहीन महासंसद का हुआ आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। गरीब मजदूर परिवारों को जबरन बेदखल करना और पुनर्वासित नहीं करना संयुक्त राष्ट्र संघ के मौलिक सिद्धांत एवं दिशा निर्देश, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। इसकी वजह से मजदूरों का उचित आवास, कार्य, आजीविका, भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि अधिकारों का हनन हुआ है। जिला प्रशासन अगर बेघरों को आवास नहीं दिया तो मानवाधिकार आयोग और उच्च न्यायालय में उठाया जाएगा। जन संस्कृति मंच के महासचिव मनोज कुमार सिंह ने कही।
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उन्होंने बेघरों के अधिकारों के बारे में संयुक्त राष्ट्र, सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से दिए गए आदेश की चर्चा करते हुए कहा कि जबरन बेदखली मानवाधिकारों का उल्लंघन है। बेघरों को उनके घर या भूमि से उसकी इच्छा के विरुद्ध बेदखल नहीं किया जा सकता। जिला प्रशासन ने विस्थापित किए गए मजदूरों के लिए स्थायी कोई प्रबंध नहीं किया है। सामाजिक कार्यकर्ता चतुरानन ओझा ने कहा कि सरकार विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ रही है। मोदी-योगी सरकार की नीतियां गरीब, किसान, मजदूर, महिला, नौजवान विरोधी है। यह सरकार सिर्फ पूंजीपतियों के लिए कार्य कर रही है। इस दौरान ऐपवा नेता गीता पांडेय, श्रीराम कुशवाहा, प्रेमलता पांडेय, हंसनाथ यादव, राजबहादुर राय, संजयदीप कुशवाहा, दरोगा यादव , अरुण कटियार आदि मौजूद रहे।
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