माकपा कार्यकर्ताओं ने धरना दिया
त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने की निंदा
अमर उजाला ब्यूरो
सलेमपुर। माकपा कार्यकर्ताओं ने त्रिपुरा में अराजकता को लेकर तहसील में बुधवार को धरना दिया। वक्ताओं ने कहा कि भाजपा सरकार बनने के पहले ही त्रिपुरा में अराजकता का वातावरण बनाने का काम किया जा रहा है। त्रिपुरा के अंदर वेलोनिया एवं अन्य स्थान पर लेनिन की मूर्ति को बुलडोजर से गिरा दिया गया। देश में दलितों व शोषितों की आवाज को दबाकर महापुरुषों की मूर्तियों को खंडित करने का काम किया जा रहा है।
माकपा के नेता सतीश कुमार ने कहा कि भाजपा सरकार आरएसएस द्वारा संचालित होती है। इन्हीं नीतियों के कारण तमिलनाडु के अंदर पेरियार की मूर्ति तोड़ी गई, देवरिया के पकड़ी में अंबेडकर के मूर्ति को तोड़ा जाना भाजपा सरकार की मानसिकता को दर्शाता है। देश के अंदर लोकतंत्र को समाप्त करना चाहते हैं। भाजपा अपने एजेंडे को लागू कर रही है। प्रेमचंद यादव ने कहा कि त्रिपुरा में भाजपा द्वारा आतंक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि राज्यसभा में बहुमत मिलने के बाद देश के संविधान को बदल देंगे। देश को भाजपा सरकार मनुस्मृति के आधार पर चलाना चाहती है। इस दौरान का. रामनिवास यादव, का. हरिबंद प्रसाद, राजेश विश्वकर्मा, श्यामदेव यादव, राम सुशील यादव, गंगा देवी, राजनाथ, रमायन यादव, राजेंद्र गुप्ता, रामचंद्र खरवार, लालचंद, तारा देवी, लीलावती देवी, सुरेश राजभर, मतिसरा देवी आदि मौजूद रहीं।
वामदलों ने धरना देकर सौंपा ज्ञापन
भाटपाररानी। त्रिपुरा की घटना को लेकर वाम दलों माकपा, भाकपा और भाकपा माले ने संयुक्त रूप से बुधवार को तहसील पर धरना दिया। बाद में उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित चार सूत्री मांगों का ज्ञापन एसडीएम रामकेश यादव को सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने कहा है कि पांच मार्च को दक्षिणी त्रिपुरा के एक शहर में लेनिन की प्रतिमा को आरएसएस और भाजपा नेताओं ने बुलडोजर लगा कर गिरा दिया। उन्होंने अनेक पार्टी कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया तथा वामदलों के कार्यकर्ताओं को मारा पीटा गया। वामदल नेताओं ने घटना की निंदा करते हुए इसे संविधान के खिलाफ तथा लोकतंत्र पर हमला बताते हुए लोकतंत्र व भारतीय संविधान की रक्षा करने, इसमें शामिल भाजपा व आरएसएस के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी तथा पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की है। इस दौरान साधुसरन, चंद्रभान यादव, अमरनाथ गोंड, जयप्रकाश यादव, जेपी कुशवाहा, नवल बिहारी, नथुनी कुशवाहा आदि मौजूद रहे।