देवरिया। जिले में नहरों का जाल तो है, लेकिन झाड़ियों से पटी हैं। सिल्ट और झाड़ी सफाई पर हर वर्ष लाखों खर्च होते हैं। रबी की फसलें उगनी शुरू हो गईं हैं और पानी की जरूरत है। रजवाहा और माइनर के सूखे होने पर सामर्थ्यवान किसान तो डीजल खरीदकर सिंचाई कर ले रहे हैं, लेकिन गरीब परेशान हैं। उनकी नजर नहरों पर है कि कब पानी आए और सिंचाई कर सकें।
ये हाल प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही के जिले का है। अन्य जिलों के हालात का अनुमान लगाया जा सकता है। देसही देवरिया ब्लॉक में तीन रजवाहे हैं। इनके नाम सिरसिया, द्वारिका और देवरिया हैं। ये तीनों कुशीनगर से होते देवरिया में प्रवेश करती हैं। इन रजवाहों से छोटी-छोटी नहरों के साथ ही सैकड़ों माइनर निकली हैं। इन माइनरों पर सैकड़ों गांव सिंचाई के लिए निर्भर हैं। सिरसिया रजवाहा से बालकुआं, पड़ौली, सहवां, जिगनी बाजार, टीला टाली, बेलवा बाजार आदि गांव जुड़े हैं। द्वारिका रजवाहा से हेतिमपुर, सहोदरपट्टी, नौतन हथियागढ़, शाहजहांपुर, वृंदावन, मैनपुर और देवरिया रजवाहा से लीलापुर, हरैया, महुआडीह, पकड़ी बुजुर्ग, रामपुर चंद्रभान, हिरंदापुर आदि गांव जुड़े हैं। गांववालों की तमाम शिकायतें हैं पर रविवार को मौके पर सिल्ट और झाड़ियों से रजवाहे इस कदर से पटे मिले कि साफ है, पानी आने के बाद भी टेल तक नहीं पहुंच पाएगा।
कई बार प्रदर्शन भी कर चुके हैं किसान
इस मामले पर किसान कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। देसही और सहोदर पट्टी में तो लोगों ने नहर को पाटकर विरोध भी जताया था। उनका कहना है था कि जब पानी ही नहीं आना है तो नहर की जरूरत ही क्या है।
माइनरों को पाटकर बना लिया खेत
देसही देवरिया ब्लॉक के देसही, मुंडेरा, मदरापाली और शाहजहांपुर गांव में माइनर की कई सालों से साफ-सफाई नहीं होने पर इसे पाटकर खेती हो रही है। कुछ गांवों के रजवाहे-माइनरों में गांव का गंदा बहता है। बरसात में इनके ओवरफ्लो होने से फसलें डूब जाती हैं।
किसान बोले, जेसीबी से न हो सफाई
सहवां के किसान बृजभान सिंह ने आरोप लगाया कि मजदूरों की जगह जेसीबी का इस्तेमाल किए जाने से रजवाहा के अंदर और किनारे की झाड़ियां ज्यों की त्यों रह जाती हैं। दोनों तरफ की मिट्टी की दीवारें की मरम्मत नहीं हो पाती। रामपुर हीरामन के विश्वनाथ का कहना है कि वक्त पर पानी नहीं आने से फसलों की सिंचाई नहीं हो पाती। बेवक्त आए तो फसलें डूबती हैं। बरवामीर छापर के काजेश्वर पांडेय ने बताया कि सालों साल नहरें सूखी ही रहती है। सिर्फ बरसात का पानी ही धान के सीजन कुछ लाभ देता है। पोटवा के शौकत खां ने बताया कि मुख्य नहरों के साथ माइनरों की सफाई भी नहीं हो पा रही है। इससे माइनरों का अस्तित्व समाप्त हो रहा है।
जरूरत के हिसाब से कराई जा रही है सफाई : कृषिमंत्री
प्रदेश के कृषि मंत्री और पथरदेवा के विधायक सूर्यप्रताप शाही का कहना है कि रजवाहों-माइनरों की सफाई जरूरत के हिसाब से कराई जा रही है। पथरदेवा इलाके की नहरें साफ हो रही हैं। देसही देवरिया ब्लॉक के नहरों और माइनरों में सफाई की अभी जरूरत नहीं है। उन्होंने भरोसा दिया कि पानी की कमी नहीं होने पाएगी।
ड्रोन कैमरों से नहरों की हो रही निगरानी
विभाग के एक्सईएन पंकज सिंह ने बताया कि सफाई के पूर्व की स्थिति, कार्य शुरू होने और खत्म होने के बाद ड्रोन कैमरों से निगरानी कराने के बाद ही ठेकेदारों का भुगतान किया जाएगा। देवरिया में 57 नहरें हैं। 16 नहरें कुशीनगर सिंचाई खंड की हैं। 41 नहरें देवरिया सिंचाई खंड में आती हैं। 16 रजवाहा कुशीनगर और देवरिया में संयुक्त रूप से हैं। इस साल नहरों की सफाई के लिए जिले 34.93 लाख रुपये मिले हैं। सफाई कार्य 22 नवंबर से शुरू हुआ है। 15 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। बताया कि नहरों की सफाई के लिए डीएम की अध्यक्षता में समिति गठित है। उसकी रजामंदी के बाद ही काम कराया जाता है। 39.15 किमी रजवाहा और 17.08 किमी माइनर की सफाई होनी है।
नहरों की जांच करने आज आएगी टीम
एक्सईएन पंकज सिंह ने बताया कि सोमवार को लखनऊ से विभागीय टीम आ रही है। यह टीम देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज में नहरों की सफाई की जांच करेगी।