देवरिया। छात्र रंजीत सिंह की हत्या के तीन आरोपियों के कोर्ट में सरेंडर के बाद भी पुलिस सचेत नहीं हुई। नतीजा पांचवें आरोपी ने भी शनिवार को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। आवश्यक कार्रवाई पूर्ण कर उसे गोरखपुर बाल सुधार गृह भेज दिया गया। इससे पूर्व तीन आरोपियों ने शुक्रवार को सरेंडर किया और एक आरोपी गिरफ्तार किया गया था।
खुखुंदू थानाक्षेत्र के बंजरिया शुक्ल गांव निवासी विजय प्रताप सिंह के बेटे रंजीत सिंह (17) की कोचिंग में सीट पर बैठने के विवाद में आठ जून की सुबह सदर कोतवाली के मालीबारी में हत्या कर दी गई। स्थानीय लोगों ने मौके से एक छात्र को पकड़ा था। मृतक के माता-पिता दिल्ली गए थे। इंदिरानगर मोहल्ले के रहने वाले फूफा ओपेंद्र कुमार राव ने सदर कोतवाली के अहिल्यापुर गांव के पांच छात्रों के खिलाफ हत्या और बलवा का केस दर्ज कराया। पुलिस आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही थी। उन पर दबाव बनाने के लिए परिवार के कुछ सदस्यों को हिरासत में लिया गया, लेकिन वे हाथ नहीं आए। शुक्रवार को तीन आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। इससे पुलिसवालों ने राहत की सांस ली थी। शनिवार को पांचवें आरोपी ने भी सरेंडर कर दिया। न्यायालय ने कार्रवाई पूर्ण करने के बाद उसे भी बाल सुधार गृह गोरखपुर भेज दिया। सदर कोतवाल यादवेंद्र बहादुर पाल ने बताया कि पुलिस के लगातार छापेमारी, परिवार और रिश्तेदारों पर दबाव बनाने से आरोपियों ने सरेंडर किया है।
गच्चा खाई या मैनेज हुई पुलिस
छात्र रंजीत की हत्या के चार आरोपियों ने 24 घंटे के अंतराल में कोर्ट में समर्पण कर दिया। पुलिस इसे ही अपनी कामयाबी बताकर खुश है। अफसरों की दलील है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयासरत थी। छापेमारी व दबिश के चलते ही आरोपियों ने समर्पण किया। थोड़ी चूक हो गई, वरना उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया होता। जिसे पुलिस का गच्चा खाना कहा जा रहा है, दरअसल वह पुलिस का मैनेज होना है। इस मामले में शुरू से ही पुलिस का रवैया सवालों के घेरे में रहा। रंजीत के माता-पिता बार-बार पुलिस पर राजनीतिक दबाव में सुस्ती बरतने का आरोप लगाते रहे हैं। चर्चा है कि धरने की चेतावनी के बाद हरकत में आई पुलिस ने मैनेज होकर आरोपियों को कोर्ट में हाजिर होने का मौका दिया।