देवरिया। बालिका गृह कांड में आठ महीने से जिला कारागार में बंद गिरिजा त्रिपाठी के दामाद और एक कर्मचारी को रिहा कर दिया गया। दोनों को हाईकोर्ट ने पिछले दिनों जमानत दे दिया था। परवाना पहुंचने पर वह शनिवार को रिहा हुए। गिरिजा के बेटे को भी जमानत मिल चुकी है, लेकिन जांच पूरी न होने से रिहाई अटकी है। गिरिजा के साथ बेटा, बेटी, दामाद और पति जिला कारागार में बंद थे।
पांच अगस्त की रात स्टेशन रोड स्थित बालिका गृह पर छापामारी कर पुलिस ने 23 बालिकाओं को मुक्त कराया था। संस्था की संचालक गिरिजा त्रिपाठी और पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने कंचनलता, गिरिजा त्रिपाठी और एक अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर छह अगस्त को जेल भेज दिया। 10 अगस्त को कंचनलता को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। एसआईटी की जांच में कुछ और लोगों के नाम प्रकाश में आए। एसआईटी के निर्देश पर कोतवाली पुलिस ने एक अक्तूबर को बालिका गृह कांड में डॉ.योगेंद्र दुबे, गिरिजा के दामाद संजीव त्रिपाठी, इंद्रहास और हयात अफरोज को गिरफ्तार कर जेल भेजा। 18 नवंबर को गिरिजा के बेटे प्रदीप त्रिपाठी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। वह परिषदीय विद्यालय में शिक्षक है। विभाग ने उसे निलंबित कर दिया। गिरिजा के दामाद संजीव त्रिपाठी, इंद्रहास ने सीजेएम न्यायालय में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया। अर्जी खारिज हो गई तो आरोपी ने एडीजे कोर्ट में गुहार लगाई। वहां से भी जमानत नहीं मिली। दोनों ने प्रयागराज हाईकोर्ट में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया। जज ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत दे दिया। पुलिस जांच के बाद संजीव त्रिपाठी और इन्द्रहास को जेल प्रशासन ने रिहा कर दिया।
वर्जन-
हाईकोर्ट के निर्देश पर संजीव त्रिपाठी और इंद्रहास को रिहा कर दिया गया है। बालिका गृह कांड के शेष आरोपी जिला कारागार में बंद है। -केपी त्रिपाठी, जेल अधीक्षक देवरिया।