देवरिया। न्यू मेट्रो हास्पिटल को सरकारी दवाएं बेचने वाले महेन पीएचसी के फार्मासिस्ट रामविलास को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उसे लार सीएचसी से संबद्ध करते हुए जांच टीम गठित कर 15 दिनों में रिपोर्ट मांगी गई है। उधर, देर शाम सरकारी दवाएं रखने वाले अस्पताल पर का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया, लेकिन संचालक पर अब तक केस दर्ज नहीं हो सका है। स्वास्थ्य मंत्री तक मामला पहुंचने के बाद भी जिम्मेदार सुस्ती बरत रहे हैं।
गोपनीय सूचना पर सीएमओ ने रामनाथ देवरिया के न्यू मेट्रो हास्पिटल पर रविवार को छापेमारी की। अस्पताल से भारी मात्रा में सरकारी दवाओं का खेप बरामद हुई। जांच के दौरान मालूम हुआ कि महेन पीएचसी पर तैनात फार्मासिस्ट रामविलास ने दवा निजी अस्पताल में बेचा था। सीएमओ ने फार्मासिस्ट को निलंबित कर एसीएमओ डॉ. संजय चंद्र को जांच अधिकारी नामित करते हुए 15 दिन के अंदर आख्या तलब की है। छापेमारी की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने भी इस कार्रवाई को सराहते हुए जिम्मेदारों को कड़ी सजा देने का उल्लेख करते हुए ट्वीट किया था। हैरानी की बात है कि इसके बावजूद अब तक अस्पताल और उसके संचालक पर अफसर मेहरबान बने हुए हैं। देर शाम को रजिस्ट्रेशन निरस्त की कार्रवाई हुई, लेकिन केस दर्ज कराने की बात कहने वाले अफसर अब सुस्त हो गए हैं। कार्रवाई को लेकर अफसरों में अंदरूनी खींचतान बढ़ गई है। बताते हैं कि छापामारी के दौरान मजिस्ट्रेट का न होना विभाग के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। करीब एक घंटे तक टीम मौके पर जमी रही, बावजूद मजिस्ट्रेट का न आना बड़ा पेंच बन गया है। इस बाबत सीएमओ डॉ. धीरेंद्र कुमार ने बताया कि फार्मासिस्ट को निलंबित कर दिया गया है। अस्पताल का पंजीकरण निरस्त हो गया है। जरूरत के हिसाब से केस भी दर्ज कराया जाएगा।
अभियान चलाकर हो जांच तो खुलेगी कलई
न्यू मेट्रो हास्पिटल में सरकारी दवा बरामद होना सिर्फ बानगी है। शहर और ग्रामीण अंचलों में संचालित हो रहे निजी अस्पतालों में भी नॉट फार सेल कर दवाएं उपयोग की जाती है। सलेमपुर में तो और बड़े पैमाने पर खेल होता है। अस्पताल गेट पर मौजूद दुकानदारों और अस्पताल कर्मचारियों की मजबूत साठगांठ है। इसकी वजह यहां पर फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय का काफी दिनों से तैनाती बताई जा रही है।
सिर्फ खानापूर्ति तक सिमटी कार्रवाई
पिछले छह माह के अंदर शहर और ग्रामीण अंचलों के निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग ने छापेमारी की। कई खामियां भी मिली, लेकिन खानापूर्ति तक ही कार्रवाई सिमट कर रह गई। रामनाथ देवरिया में एक निजी अस्पताल में आशाओं ने डिलेवरी कराया था। जांच में पोल खुली तो अस्पताल संचालक संतोष यादव पर केस भी दर्ज हुआ। कुछ दिन अस्पताल बंद रहा। फिर बाद में उसी संचालक को सीएमओ कार्यालय से नाम बदलकर रजिस्ट्रेशन कर दिया गया। इस अस्पताल में सरकारी अस्पताल के डॉक्टर भी ऑपरेशन करने के लिए जाते हैं। ऐसे कई अन्य निजी अस्पताल भी हैं, जो जिम्मेदारों की सह पर चल रहे हैं।