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सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे 626 परिषदीय स्कूल

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एक शिक्षक के भरोसे चल रहे 626 परिषदीय स्कूल
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नौनिहालों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावों की खुल रही पोल
जूता-मोजा वितरण में व्यस्त गुरुजी, पढ़ाई हो रही बाधित
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। नौनिहालों की बेहतर शिक्षा के सरकारी दावों की परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी पोल खोल रही है। जिले के 1876 प्राथमिक विद्यालयों में 626 ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक शिक्षक की तैनाती है। यह सभी विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। पांच कक्षाओं की पढ़ाई, ड्रेस-बैग वितरण, मिड-डे मील सहित अन्य सभी जिम्मेदारियां इसी शिक्षक के कंधे पर है। उसे विद्यालय में नामांकन भी बढ़ाना है सभी नामांकित बच्चों को नियमित पढ़ाना भी है। ऐसे हाल में इन स्कूलों में पढ़ाई कैसे होती होगी, अंदाजा लगाया जा सकता है।
जिले के 1840 प्राथमिक विद्यालयों में एक-एक प्रधानाध्यापक के अलावा 4395 सहायक अध्यापकों के पद है। शहरी क्षेत्र के 36 स्कूलों में प्रधानाध्यापक समेत 117 पद हैं। आरटीई के मानकों के तहत शिक्षकों की यह संख्या आधे के बराबर है। शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द होने के बाद स्थिति अधिक बिगड़ी है। रही-सही कसर अंतर्जनपदीय तबादलों ने पूरी कर दी है। जिले के 180 शिक्षक गैर जिलों में भेजे गए, जबकि महज 79 ही यहां भेजे गए। मौजूदा स्थिति में आलम यह है कि सवा छह सौ स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे ही संचालित हो रहे हैं। स्कूल में पढ़ाई से लेकर कागजी कार्य निपटाने की पूरी जिम्मेदारी इन्हीं शिक्षकों पर है। इस समय स्कूलों में नामांकन का कार्य चल रहा है। घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों के नामांकन के प्रति उन्हें जागरूक करते हुए नौनिहालों का दाखिला कराने में भी शिक्षक लगाए गए हैं। उन्हीं पर मिड-डे मील अपनी निगरानी में बनवाने का जिम्मा सहित कई अन्य कार्य भी हैं। ऐसे माहौल में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे पाना चुनौती बन गया है।
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अंग्रेजी को संवारने में बिगड़े हालात
परिषदीय स्कूलों के बच्चों को कान्वेंट के समकक्ष तैयार करने के मकसद से सरकार ने इस वर्ष से चुनिंदा स्कूलों का अंग्रेजी माध्यम से संचालन शुरू कराया है। जिले में 90 स्कूल इस श्रेणी में चयनित हैं। सरकार की प्राथमिकता वाले इन स्कूलों में चार शिक्षक और एक प्रधानाध्यापक की तैनाती का मानक पूरा करने के लिए अन्य स्कूलों से शिक्षकों को यहां समायोजित किया गया है। इसका असर यह है कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में तो स्टॉफ बढ़ गया, मगर अन्य स्कूल खाली हो गए हैं।
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शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द होने के बाद सहायक अध्यापकों की काफी कमी हुई है। शासन स्तर से भर्ती प्रक्रिया चल रही है। कोई भी स्कूल बंद न रहे, फिलहाल इसकी व्यवस्था की गई है। जल्द ही इसका भी समाधान किया जाएगा।
- संतोष कुमार देव पांडेय, बीएसए।
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