देवरिया में छह लेखपालों की सेवा समाप्त
प्रतिबंध के बावजूद हड़ताल करने पर प्रशासन ने की कार्रवाई
कार्रवाई की जद में आए सभी लेखपाल प्रशिक्षु
अन्य 318 लेखपालों पर भी शीघ्र होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। एस्मा लागू होने के बाद भी हड़ताल पर डटे लेखपालों पर अब बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू हो गई है। शुक्रवार को जिले की विभिन्न तहसीलों में तैनात छह लेखपालों की सेवा समाप्त कर दी गई। यह सभी प्रशिक्षु लेखपाल हैं। इन्हें गुरुवार को ही प्रशासन ने नोटिस दे दिया था। 318 अन्य प्रशिक्षु लेखपालों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उधर, बस्ता जमा न करने वाले पुराने लेखपालों पर भी केस दर्ज कराने की तैयारी है।
जिले की पांच तहसीलों में कुल 473 लेखपाल कार्यरत हैं। इसमें 324 प्रशिक्षु लेखपाल हैं। इनकी दो वर्ष की प्रशिक्षण अवधि अभी पूरी नहीं हुई है। शासन की ओर से एस्मा लगाए जाने के बावजूद हड़ताल कर लेखपालों से वार्ता कर जिला प्रशासन ने काम पर लौटने की अपील की थी। जिलाध्यक्ष समेत 11 लेखपालों का निलंबन कर दबाव बनाने की कोशिश हुई। इसके बाद भी लेखपाल नहीं मानें तो गुरुवार को सभी तहसीलों के एसडीएम ने अपने तहसील क्षेत्र में कार्यरत प्रशिक्षु लेखपालों को सेवा समाप्ति की नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे में काम पर लौटने का आदेश दिया था। इसके बावजूद सभी लेखपाल शुक्रवार को भी हड़ताल पर डटे रहे। लिहाजा प्रशासन ने उनके सेवा समाप्ति की कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले चरण में छह लेखपालों को बर्खास्त किया गया है। इनमें सर्वाधिक तीन सलेमपुर तहसील क्षेत्र के हैं। सदर, बरहज और भाटपाररानी के भी एक-एक लेखपालों पर भी कार्रवाई की गई है। इस संबंध में एडीएम सीताराम गुप्ता ने बताया कि शासन के आदेशों की अवहेलना करने वाले सभी लेखपालों पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल छह प्रशिक्षु लेखपालों की सेवा समाप्त की गई है। जल्द ही अन्य लेखपालों का भी आदेश जारी कर दिया जाएगा।
इनकी हुई सेवा समाप्त
सदर तहसील के उमंग सिंह, सलेमपुर के रजत कुमार, नंदलाल गुप्ता, अमरेश मौर्य, बरहज के रामकुमार, भाटपाररानी के पितांबर की सेवा समाप्ति का आदेश हुआ है।
लेखपालों का ऐलान, नहीं झुकेंगे
देवरिया। कार्रवाई के बावजूद लेखपाल शुक्रवार को भी कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर डटे रहे। जिलाध्यक्ष चंद्रभूषण पांडेय ने कहा कि प्रशासन चाहे जितना जुल्म ढा ले, लेखपाल नहीं झुकेंगे। आर-पार की लड़ाई का मूड बना चुके हैं। उन्होंने उत्पीड़नात्मक कार्यों की कड़ी निंदा की। जिला मंत्री अमरेंद्र तिवारी ने कहा कि लेखपाल प्रशासन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, बावजूद उसके हितों की अनदेखी की जा रही है। धरने में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिला ऑडिटर रमेश चंद्रपति त्रिपाठी भी शामिल हुए और समर्थन का ऐलान किया। इस मौके पर रवि पटेल, दिग्विजय मिश्र, गणेश शंकर त्रिपाठी, राजकुमार मिश्र, नर्वदेश्वर मिश्र, कृष्णकांत, शैलेष कुशवाहा, सुनील श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।