देवरिया। गांवों में आशा बहू हाई ग्रेड फीवर मरीजों को नहीं ढूंढने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही हैं। ऐसे में बुखार से पीड़ित अधिकांश मरीज सीएचसी पर आने की बजाए झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं। जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए मलेरिया विभाग हाई ग्रेड फीवर वाले रोगियों को चिह्नित कर रहा है। नौ माह में ऐसे 659 मरीज मिले हैं। इसमें जेई, एईएस के जहां अधिकांश रोगी मिले हैं, वहीं स्क्रब टाइफस के 16 नए मरीजों की पहचान हुई है। जिले में इस बीमारी की नई बैक्टीरिया के मिलने से स्वास्थ्य महकमा चिंतित हैं। गांवों में हाई ग्रेड फीवर से पीड़ित मरीजों को नजदीकी सीएचसी या पीएचसी पर पहुंचाने या अस्पताल जाने के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी आशा बहुओं को दी गई है। अस्पताल पहुंचाना तो दूर की बात वह ऐसे मरीजों को प्रेरित भी नहीं कर रही हैं। एक जनवरी से 30 सितंबर तक जिले में 659 हाई ग्रेड फीवर के मरीज मिले हैं। विभागीय जांच में 16 ऐसे मरीज सामने आए हैं जिनको स्क्रब टाइफस की वजह से बुखार आ रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि अस्पतालों आ रहे हाई ग्रेड फीवर वाले रोगियों को चिह्नित कर इनकी जांच कराई जा रही है। स्क्रब टायफस के मरीज मिले हैं। इस पर काबू के लिए प्रयास किया जा रहा है।
स्क्रब टाइफस ज्वर के लक्षणा
मरीज को 104 से 105 तक बुखार आता है
दूसरा लक्षण कंपकंपी और जोड़ों में दर्द
तीसरा लक्षण शरीर का अकड़ना, ऐंठन और टूटना
चौथा लक्षण बाजू, हाथ और गर्दन में गिल्टियां होना
कैसे फैलता है स्क्रब टाइफस ज्वर
यह बीमारी बरसात के दिनों में अधिक फैलती है। डॉक्टरों की मानें तो लोग बरसात के मौसम में काम करने बाहर जाते है तो उसी समय जंगलों या खेतों में काम करते समय पिस्सू नाम के जीवाणु के काटने से स्क्रफ टायफस का वायरस शरीर में चला जाता है। 48 से 72 घंटे बाद इसका असर शरीर में दिखने लगता है।