देवरिया। डॉ. अब्दुल खालिद के हत्यारों के गिरफ्तारी की जिद पर अड़े चिकित्सकों ने ओपीडी नहीं किया। इसकी वजह से मरीजों को दुश्वारियां झेलनी पड़ी। जिला अस्पताल में घंटों इंतजार के बाद मरीजों को निजी डॉक्टरों के पास जाना पड़ा। वहीं इमरजेंसी में पहुंचे वाले मरीजों को सिर्फ इलाज मिला।
साथी की हत्या से नाराज चिकित्सकों की जिद के आगे मरीजों की बेबसी हार गई। सुबह आठ बजे अस्पताल खुला तो पर्ची काउंटर पर लोगों की भीड़ जुट गई। सुबह 11 बजे तक 600 पर्ची कटा था। दोपहर एक बजे तक लोग डॉक्टरों के आने का इंतजार किया। प्रदर्शन में शामिल डॉक्टरों से कई लोगों ने इलाज के लिए गुहार लगाई। लेकिन डॉक्टरों ने इनकी एक नहीं सुनी। अमतही की मंजू देवी अपनी बीमार बेटी निशा को लेकर आई थी। इलाज के इंतजार में बेटी को कुर्सी पर लिटाई हुई थी। अगस्तपार से आए मोती प्रसाद, परसा जंगल से आई मुअली, गोरख प्रसाद, चादपुर से जयप्रकाश उपाध्याय, पिपरा से चांदबली, बअलुअन से विद्या देवी, हनुमान मंदिर रोड से आई अनिता देवी का कहना था कि आज तो हड़ताल है। अन्य दिन भी इलाज के लिए मशक्कत करना पड़ता है। इसमें आम लोगों का क्या कसूर है, कि इनका इलाज नहीं किया जा रहा है। यह चिकित्सकों की मनमानी है। मजबूरी में रकम खर्च कर लोगों ने प्राइवेट डॉक्टरों से इलाज कराया।
वार्ड में ले जाने को नहीं मिला स्ट्रेक्चर
कुईया की रहने वाली काजल बीमार थी। घर वाले उसे इमरजेंसी में ले गए। इलाज के बाद डॉक्टर ने वार्ड में भर्ती करने को कहा। स्ट्रेक्चर नहीं मिला तो उसके पिता बेटी को कंधे पर लेकर वार्ड की ओर चल दिए। पूरे दिन मरीज इलाज कराने को लेकर परेशान नजर आए।
सीएचसी और पीएचसी पर भी असर
जनपद के लार, सलेमपुर, भागलपुर, भाटपारानी, भटनी, खुखुंदू समेत सभी पीएचसी और सीएचसी केंद्रों पर आए मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। अस्पताल के बाहर डॉ. अब्दुल खालिद की कातिलों की गिरफ्तारी की मांग का पोस्टर चिकित्सक लगा रखे थे। इसकी वजह से इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर को दिक्कते हुई।
सीएमओ कार्यालय में घंटों चली बैठक
जिला अस्पताल पर सुरक्षा की दृष्टिकोण से पुलिस तैनात रही। ताकि किसी भी तरह का कोई बवाल न हो। लेकिन चिकित्सक और कर्मचारियों ने शांति तरीके से आवाज बुलंद किया और सीएमओ कार्यालय में घंटों बैठक चली।