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तीन घंटे इंतजार के बाद नहीं आई एंबुलेंस

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देवरिया। प्रसूताओं को अस्पताल से घर तक पहुंचाने का सरकार का दावा खोखला साबित हो रहा है। तीन घंटे इंतजार के बाद एंबुलेंस नहीं आई तो मजबूरी में प्रसूता के घरवालों को निजी एंबुलेंस की मदद लेनी पड़ी। एंबुलेंस की मॉनीटरिंग लखनऊ से होने की बात कह जिम्मेदारों ने पल्ला झाड़ लिया।
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बिहार बॉर्डर के भिंगारी बाजार निवासी शिवानंद की पत्नी पूनम को एक सप्ताह पूर्व जिला महिला अस्पताल में प्रसव हुआ। जच्चा-बच्चा स्वस्थ्य होने के कारण शनिवार को अस्पताल से डॉक्टर ने घर जाने की इजाजत 10 बजे दे दिया। प्रसूता को ले जाने के लिए शिवानंद ने 102 नंबर पर फोन किया। लखनऊ सेंटर में कॉल रिसीव करने वाले वर्कर ने दिन में एक बजे तक एंबुलेंस पहुंचने का आश्वासन दिया, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। इसकी शिकायत प्रसूता के घरवालों ने स्टॉफ नर्स और महिला सीएमएस से की। स्वास्थ्य कर्मियों ने एंबुलेंस की मॉनीटरिंग लखनऊ से होने की बात कह टाल दिया। मजबूरी में शिवानंद को एक हजार खर्च कर प्राइवेट एंबुलेंस से प्रसूता को घर ले जाना पड़ा। ऐसी कहानी कई प्रसूताओं के घरवालों के साथ 102 पर एंबुलेंस के लिए कॉल करने वालों के साथ हो चुकी है। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. माला सिन्हा ने बताया कि अस्पताल से एंबुलेंस से कोई लेना-देना नहीं। लखनऊ से इसकी मॉनीटरिंग होती है। इसके चलते हम लोग कुछ नहीं कर सकते।
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