रुद्रपुर (देवरिया)। भीषण त्रासदी झेल रहे दोआबा के 52 गांव बाढ़ के भंवर से उबर नहीं पा रहे हैं। हर दस से बीस साल पर बाढ़ की मार झेलने वाले दोआबा और कछार के लोगों को नदी ने कभी सुकून से जीने नहीं दिया। गरीबों और मजलूमों में खैरात बांटने की हैसियत रखने वालों को भी जीवन बचाने के लिए इमदाद लेनी पड़ रही।
22 अगस्त को बेलवा का जमींदारी बांध टूटते ही दोआबा के 52 गांवों में जल प्रलय शुरू हो गया। बेलवा, लालपुर परसिया, बनियापार, रामकुटी, जगरनाथपुर , पचरुखा, बैदा, सरांव, एकौना, नगवा, डढ़िया गांवों सहित दोआबा के सभी गांव अथाह पानी से घिर गए। दोआबा के 52 गांव के करीब दो लाख लोग सात दिनों से जिंदगी का सबसे बुरा दिन देख रहे हैं। इन गांवों में ऐसे परिवार भी हैं जो हरदम गरीब और मजबूर लोगों के मददगार रहे हैं, लेकिन घर में सब कुछ रहने के बाद भी उन्हें इमदाद के लिए हाथ फैलाना पड़ रहा है। बेलवा गांव की यशोदा देवी ने कहा कि भगवान दुश्मन को भी कभी ऐसे दिन न दिखाए।
बाढ़ के पानी से घिरे लोग जलालत भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। गांव में संपन्न लोगों को भी नजरें झुका कर राहत का पैकेट लेना पड़ रहा है। घर में रखा अनाज पानी में डूब गया है। बैदा के पूर्व प्रधान विनोद शुक्ला ने कहा कि सात दिन तक तो बाढ़ पीड़ित अपने संसाधनों से बाढ़ से लड़ते रहें। अब जमा संसाधन समाप्त होने को हैै। प्रशासन हर गांवों में राहत नहीं पहुंचा पाया है। लोगों की स्थिति चिंताजनक होती जा रही हैं। गांव में आवागमन के लिए बड़ी नावों की जरूरत पूरी नहीं हो रही। जगरनाथपुर के शिवानंद नायक ने कहा कि सरकारी राहत पैकेट पूरी तरह नहीं बट पाया है। जगरनाथपुर में लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। बाढ़ पीड़ित बहुत बुरे हाल में किसी तरह जिंदा हैं।