फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस साल अपाकर्म श्रावणी पर ग्रहण

विज्ञापन
विज्ञापन
सुनील कुमार सिंह
विज्ञापन

देवरिया। उपाकर्म श्रावणी पर इस साल ग्रहण लग रहा है। पूर्णिमा के दिन ही खंड चंद्रग्रहण लगने से इस कर्म को नागपंचमी के दिन ही पूरा किया जाएगा। श्रावणी कर्म ब्राह्मणों और वेद उद्देश्य को ग्रहण करने वालों के लिए महत्वपूर्ण पर्व होता है। माना जाता है कि इससे द्विजत्व की सिद्धि प्राप्त होती है।
ज्योतिषाचार्य विवेक उपाध्याय बताते हैं कि हर वर्ष रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म एक ही दिन पड़ता था, लेकिन इस साल इसी दिन खंड चंद्रग्रहण लग रहा है। इसके चलते इन पर्वों के समय को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस साल पूर्णिमा के दिन भद्रा के साथ-साथ खंड चंद्रग्रहण लगने से रक्षाबंधन पर्व को उचित समय पर करना ही शुभ होगा। इस दिन भद्रा सुबह 10.30 बजे तक है। चंद्रग्रहण सात अगस्त को रात 10.53 पर लग रहा है। ग्रहण का मध्य रात्रि 11.51 तक और मोक्ष समय रात्रि 12.48 बजे हो रहा है। ग्रहण की कुल अवधि 1.55 घंटे की हो रही है। चंद्रग्रहण में नौ घंटे पूर्व सूतक को धर्मशास्त्रों ने ग्रहण किया है। अत: अपराह्न 1.53 के बाद सूतक की प्रवृत्ति मानी जाएगी। ऐसी स्थिति में भद्रा के उपरांत सुबह 10.30 से अपराह्न 1.53 तक यानी 3.23 घंटा समय रक्षाबंधन पर्व के लिए शुभ रहेगा। इस वर्ष ग्रहण दोष के कारण उपाकर्म सात अगस्त की बजाय 28 जुलाई दिन शुक्रवार को किया जा सकेगा। जिसमें ऋग्वेदी, शुक्ल यजुर्वेदी, काण्व और माध्यदिंनी शाखा के आचरित विद्वानों के लिए उपाकर्म श्रावणी करना शुभ होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

द्विजातीय दुख, शोक और रोग की होगी वृद्धि
ज्योतिषाचार्य विवेक उपाध्याय बताते हैं कि मदनरत्न में आचार्य गर्ग ने स्पष्ट कहा है कि जिस वर्ष उपाकर्म श्रावणी किसी भी दोष से युक्त हो, उस वर्ष उस राज्य के राजा को द्विजातीय दुख, शोक और रोग के वृद्धि से संतप्त होना पड़ता है। इससे यह कहा जा सकता है कि निश्चित तौर पर देश में जातीय समीकरण को लेकर संघर्ष की स्थिति पैदा कर सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें