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अपने ही घर में गुमनाम हुए सेनानी

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कैप्टन मूर की गोलियां खाई, नहीं झुकने दिया तिरंगा
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शहादत दिवस चौदह अगस्त पर विशेष...

आज ही शहीद हुए थे पं.विश्वनाथ मिश्र व जगरन्नाथ मल्ल
अमर उजाला ब्यूरो
कपरवार। आंखों में आजादी का सपना छिपाए देश पर मर मिटने वाले अमर शहीदों को सतत स्मरण किया जाता रहेगा। इसमें पं. विश्वनाथ मिश्र और जगरन्नाथ मल्ल का नाम शामिल है। मां भारती के यह सपूत 14 अगस्त 1942 को नगर के पैना रोड पर कैप्टन मूर की गोलियों से शहीद हो गए।
सरयू के तट पर बसे ग्राम परसिया कूरह गांव में 10 जुलाई 1917 को जन्मे विश्वनाथ मिश्र बचपन से ही क्रांतिकारी विचारों के थे। आश्रम में शिक्षा ग्रहण करते समय ही गांव-गांव से चिटुकी मांगकर क्रांतिकारियों की मदद करते रहे। दूसरे गांवों में जाकर मीटिंग करते और लोगों को स्वावलंबन का पाठ पढ़ाते थे। 1935 में अपने क्रांतिकारी भावनाओं के साथ वर्मा चले गए। उग्र विचारों के कारण 1938 में वर्मा से स्वदेश लौटना पड़ा। उधर, बरौली ग्राम निवासी जगरन्नाथ मल्ल भी शुरू से विद्रोही भाव के रहे। आजादी की अलख जगाए रखने के लिए उन्होंने घर भी त्याग दिया। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ छिड़े आंदोलन के दौरान 14 अगस्त को पैना रोड पर जुलूस निकाला गया। जुलूस को रोकने के लिए अंग्रेजी फौज ने काफी कोशिश की, लेकिन बुलंद हौसलों के धनी सेनानी आगे बढ़ते रहे। कैप्टन मूर के आदेश पर फायरिंग शुरू हुई। बावजूद विश्वनाथ मिश्र और जगरन्नाथ मल्ल हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ते रहे। अंतत: उन्हें शहीद होना पड़ा। पैना रोड पर आज भी इनकी वीरता की गाथा स्मारक के रूप में मौजूद हैं। इनकी कुर्बानियों को याद कर हर कोई गौरवान्वित हो रहे हैं।
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शहीद स्मारक पर दीपदान आज
बरहज। विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल के शहीद स्मारक पर शहादत दिवस पर गुरुवार को दीपदान का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। यह जानकारी देते हुए आयोजक अनिल निषाद ने बताया कि स्मारक पर गत वर्षों की भांति इस बार भी गोष्ठी और दीपदान कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
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