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छात्राओं को नहीं, गुरुजी को अलॉट हो गया हॉस्टल

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आसिफ इकबाल
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देवरिया। संत विनोबा पीजी कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल में शिक्षकों का कब्जा है। चार साल से अधिक समय हो गए हैं, लेकिन अब तक छात्राओं को कमरे अलॉट नहीं हो सके हैं। इस दिशा में कॉलेज प्रबंधन पहल भी नहीं कर रहा है। आखिर छात्राओं को आवंटन की प्रक्रिया कब शुरू होगी। छात्राओं के लिए जिले में इकलौता गर्ल्स हॉस्टल है। जिम्मेदार पहल करने से कतरा रहे हैं।
शहर के न्यू कॉलोनी में संत विनोबा पीजी कॉलेज है। बीए, एमए के अलावा एलएलबी की कक्षाएं चलती है। यहां पर छात्र छात्राओं के लिए को-एजुकेशन की सुविधा है। खास बात यह है कि कॉलेज आबादी के बीच में है। आसपास के इलाकों में कॉलेज की ख्याति हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने गर्ल्स हॉस्टल के लिए धनराशि स्वीकृति की। राज्यसभा की सांसद कनकलता सिंह ने दो मई 2013 को लोकार्पण किया। हॉस्टल दो मंजिला है। उसमें 20 कमरे हैं। खास बात है कि हॉस्टल की बिल्डिंग कॉलेज कैंपस में हैं। ग्राउंड फ्लोर पर वार्डेन समेत अन्य दफ्तर रहेंगे, लेकिन चार साल से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी हॉस्टल के अलॉट की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। फिलहाल 2017-18 का शैक्षणिक सत्र शुरू हुए ढाई महीना गुजर गया है, लेकिन इस सत्र में भी पहल नहीं की जा रही है। देहात इलाके के कई छात्राएं न्यू कॉलोनी, चकिया, रामगुलाम टोला, संकट मोचन नगर, भीखमपुर रोड आदि इलाकों में किराये पर कमरा लेकर रहती हैं। इसके चलते अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। नाम न छापने की शर्त पर शुक्रवार को कॉलेज में पढ़ाई करने आई कुछ छात्राओं ने बताया कि किराए का रूम लेकर रहना मजबूरी है। ताकि समय से कॉलेज पहुंच जाएं और हॉयर एजुकेशन हासिल कर कॅरियर संवार सके। छात्राओं को हॉस्टल आवंटित नहीं हुआ है लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने शिक्षकों का अलॉट कर दिया है। इसमें सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज के कोऑर्डिनेटर डॉ. शैलेंद्र राव और दूसरा कमरा कोऑर्डिनेटर नैक और तीसरा कमरा कोऑर्डिनेटर आईक्यूएसी के नाम आवंटित है। इस बाबत प्राचार्य डॉ. असीम सत्यदेव ने कहा कि छात्राओं से कई बार कहा गया है। हॉस्टल के कमरों के लिए आवेदन करें। आवेदनपत्र मिलने पर अलॉट किया जाएगा।
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जरूरी नहीं था क्यों बनाया हॉस्टल
हॉस्टल के निर्माण हुए चार शैक्षिक सत्र गुजर गया है। इस पर 1.08 करोड़ रुपये भी खर्च हुए हैं। बीए और एलएलबी का एक बैच भी पास आउट हो गया है, लेकिन अब तक आवंटन प्रक्रिया के लिए पहल नहीं हुई है। इसके चलते हॉस्टल के निर्माण के औचित्य पर सवाल उठ रहा है। यूजीसी ने बगैर मांग के हॉस्टल के निर्माण की मंजूरी तो दी नहीं होगी। अब बनने के बाद आखिर कॉलेज प्रशासन आवंटन क्यों नहीं हो रहा है।
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