देवरिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने लोगों का बुधवार को गुस्सा फूट पड़ा। करीब 12.30 बजे सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष शिक्षामित्र सुभाष चौक पर एकत्र होकर देवरिया-गोरखपुर मार्ग को जाम कर दिया। नौकरी जाने के भय से कुछ महिलाएं रो रही थीं। जाम खुलवाने के लिए अधिकारियों को नाको चने चबाने पड़े। करीब एक घंटे के बाद जाम खत्म हुआ।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर सुबह से ही ऊहापोह की स्थिति रही। 12 बजते-बजते शिक्षामित्रों का धैर्य जवाब दे गया। सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष शिक्षामित्र बीएसए कार्यालय के पास टाउनहाल पर एकत्र हुए। यहां से नारेबाजी करते हुए सुभाष चौक पर आकर देवरिया-गोरखपुर मार्ग को जाम कर दिया। इसके बाद सरकार विरोध नारे गूंजने लगे। जाम की सूचना पाते ही प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए। जाम के कारण मार्ग के दोनों तरफ वाहनों की कतारें लग गईं। करीब डेढ़ बजे तक मार्ग जाम रहा। अपर्णा सिंह ने कहा कि उनके साथ छल हुआ है। यदि यही फैसला आना था, तो नौकरी देना ही नहीं चाहिए। रानी त्रिपाठी ने कहा कि यह अधिकार की लड़ाई है। हम पीछे नहीं हटेंगे। सरकार को कोई न कोई निर्णय लेना पड़ेगा। गायत्री त्रिपाठी ने कहा कि इसके लिए सीधे तौर पर सरकार जिम्मेदार है। बाद में शिक्षामित्रों ने टाउनहाल परिसर में सभा कर आंदोलन की अगली रणनीति तैयार की। इसके बाद शिक्षामित्रों को जत्था बीएसए कार्यालय पहुंचा और मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। सुरक्षा के लिहाज से बीएसए कार्यालय पर पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है।
नेताओं से मांगा जवाब
बैठक के दौरान जब वक्ता संबोधित कर रहे थे तो बीच-बीच में महिला शिक्षामित्र गुस्सा उतारने से भी पीछे नहीं हटीं। उनका कहना था कि मुकदमे की पैरवी के नाम पर खूब चंदा वसूली की गई, संगठन से जुड़े नेताओं ने इन पैसों से लखनऊ में घर बनवा लिया। पहले वह जवाब दें कि कहां-कहां पैसे खर्च हुए हैं।