सलेमपुर में टीटीई बनकर ट्रेन में टिकट चेक करते एक संदिग्ध युवक को आरपीएफ ने पकड़ा।
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सलेमपुर। बरहजिया ट्रेन में टीटीई बनकर टिकट की जांच कर रहे एक युवक को पकड़ा गया। बरहज से वापस लौटने पर सलेमपुर रेलवे स्टेशन पर तैनात टीटीई ने पूछताछ के बाद उसे पकड़ लिया। डीसीआई ने उसे आरपीएफ भटनी के जिम्मे सौंप दिया है। तहरीर नहीं मिलने से देर रात तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
गुरुवार की रात एक युवक सलेमपुर स्टेशन पर पहुंचा। टीटीई बताकर रेलवे के विश्रामालय में अपना बैग रख दिया। शुक्रवार की सुबह वह बरहजिया ट्रेन चढ़कर टिकट चेक करने लगा। बरहज बाजार से पुन: टिकट जांच करते हुए दोपहर 12 बजे सलेमपुर रेलवे स्टेशन पहुंचा। यहां तैनात टीटीई दीपक चौबे ने उससे पहचान पत्र मांगा तो वह नहीं दे सका। शक होने पर उन्होंने उच्चाधिकारियों को सूचना दी। पकड़ा गया युवक लार इलाके के एक गांव का निवासी है। उसने बताया कि एक साथी के माध्यम से लखनऊ में धीरेंद्र सिंह नाम के एक व्यक्ति से मुलाकात हुई। वह रेलवे में टीटीई की नौकरी दिलाने के नाम पर नौ लाख रुपये ले लिया। 2014-15 में ज्वाइनिंग लेटर दिया। पहली तैनाती कानपुर में हुई।
वह ड्यूटी भी कर रहा था। उसे 35 हजार रुपये महीना मिलता था। उसने बताया कि धीरेंद्र सिंह के अलावा बाराबंकी में परिचालन पर पद तैनात एक महिला उसकी ड्यूटी लगाते थे। धीरेंद्र सिंह के कहने पर वह सलेमपुर आकर टिकट जांच कर रहा था। पकड़े जाने के बाद उसे ठगी का अहसास हुआ। उसने यह भी बताया कि 40 युवकों को ऐसे ही नौकरी दिया गया है। डीसीआई एसएन मीणा ने आरपीएफ भटनी को सूचना दी। आरपीएफ ने युवक को हिरासत में ले लिया है। आरपीएफ इंस्पेक्टर प्रियांशु प्रिय ने बताया कि अभी केस दर्ज नहीं किया गया है। रेलवे एक्ट की धाराओं में उस पर केस दर्ज किया जाएगा।
केस दर्ज कराने को ले देर शाम तक होती रही टालमटोल
ट्रेन में अनधिकृत रुप से टिकट चेक करते गए पकड़े गए युवक पर केस दर्ज कराने को लेकर रेलवे के अफसरों में देर शाम तक गतिरोध बना रहा। कोई भी तहरीर देने को आगे नहीं आ रहा था। उन्हें यह चिंता थी कि तहरीर देने के बाद वह मुकदमे में वादी बनेंगे, जिससे उन्हें अतिरिक्त परेशानी झेलनी होगी। यही कारण था कि रात आठ बजे तक कार्रवाई के लिए आरपीएफ तहरीर का इंतजार करती रही।