देवरिया। रुद्रपुर और बरहज में कुदरत का कहर झेल रहे बाढ़ पीड़ितों की रात अंधेरे में कट रही है। ऐसे में दो दर्जन से अधिक बाढ़ प्रभावित गांवों वालों में केरोसिन का वितरण नहीं हो सका है। इसकी बाढ़ प्रभावित गांवों में जाने के लिए संसाधन की कमी बताई जा रही है। वहीं दो गांव ऐसे है जहां नेता, मंत्री और सहायता देने वाले अन्य लोग पहुंच रहे है। इससे नाराज अन्य बाढ़ पीड़ित प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं।
रुद्रपुर तहसील में 52 गांव के लोग बाढ़ की विभिषिका झेल रहे है। कुदरत की कहर ने जहां अनेक लोगों को बेघर कर दिया है। वहीं कई लोगों की जीवन लीला समाप्त हो गई है। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए शासन से छह करोड़ रुपये मिला है। प्रशासन इसके जरिए बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहा है। 25 अगस्त को 96 किलो लीटर केरोसिन मिला। प्रत्येक परिवार को पांच लीटर केरोसिन देना है। 2500 लीटर बरहज क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों को भेज दिया गया और अन्य रुद्रपुर को। पूर्ति विभाग का दावा है कि माझा नारायण, कोड़रा, बैदा, धर्मपुर, जगदीशपुर, बहोरा छापर खुर्द, लालपुर, मठिया पांडेय, परसिया, हड़हा, लीलापुर समेत कई बाढ़ प्रभावित गांवों की दूरी रुद्रपुर से इन गांवों की दूरी सात से 15 किमी दूर है। यहां जाने के लिए संसाधन नहीं होने के कारण सिर्फ 15 किलोलीटर केरोसिन बाढ़ पीड़ितों में वितरण हो सका है। रुद्रपुर के करीब का गांव विशुनपुर बगही और बेलवा दुबौली अफसरों और नेताओं को लेकर कर्मचारी पहुंच रहे हैं। नजदीक होने के कारण इन गांव के बाढ़ पीड़ितों को भोजन, दवा आसानी से उपलब्ध हो जा रही है। दूर के गांवों में सिर्फ दिन में भोजन लेकर एनडीआरएफ की टीम पहुंच रही है। इसके लिए सरकारी इमदाद बाढ़ की बीच भवंर में फंसे गांव वालों को पूर्ण रूप से नहीं मिल पा रहा है। जिला पूर्ति अधिकारी केजी पांडेय ने बताया कि छोटी नाव होने के कारण शुरू में दिक्कत हुई। रुद्रपुर से दूर के गांवों में केरोसिन वितरण नहीं हो सका है।